September 17, 2019
ऑफबीट

देश में ‘नियम’ और ‘व्यवस्था’ का दोहरा चरित्र

हमारे देश में वर्ग विशेष के हिसाब से अलग अलग नियम कानून बनाए गए हैं… ना ना.. ST/SC एक्ट की बात नहीं कर रहा भाई… बात हो रही है नौकरी पेशा और राजनीति पेशा के बीच दोहरे मानदंडों की… एक तरफ वो वर्ग है परोक्ष रूप से देश चलाता है, सिस्टम चलाता है यानि कि आप उसे सरकार के हाथ पैर आंख कान नाक और दिमाग कह सकते हैं, जबकि दूसरी तरफ वो जमात है जो देश पर हुकूमत करता है, राज्यों पर हुकूमत करता है. नेता जी लोग. देखिए जरा कि दोनों के सेलेक्शन और इलेक्शन में कितना भेदभाव है. फिलहाल एक देश, एक इलेक्शन का माहौल चल रहा है इसीलिए एक देश एक कानून एक व्यवस्था की बात कर रहा हूं.

सरकारी नौकरी पेशा वर्ग ———————

-चरित्र साफ सुधरा हो

-आपराधिक रिकॉर्ड न हो

-आवेदित पद के लिए जरूरी शैक्षिक योग्यता हो

-डिफेंस और पुलिसिंग में आने के लिए जरूरी कद काठी हो

-परीक्षा, इंटरव्यू और शारीरिक दक्षता मानक पूरा करने पर ही नियुक्ती

-एक तय उम्र सीमा तक ही सरकारी नौकरी में आवेदन के योग्य

-60, 62 साल बाद सेवानिवृत्त होना अनिवार्य

-नौकरी में आने पर सेवा नियमावली का पालन करना अनिवार्य

-सिर झुकाकर अपने अधिकारी के आदेशों का पालन करो

-अपने अधिकारी का पलटकर जवाब नहीं दे सकते

-अपने विभाग की गैरकानूनी बातें सार्वजनिक नहीं कर सकते

-पूरी उम्र सरकार की सेवा करने के बाद रिटायरमेंट के बाद पेंशन नहीं

आदि …आदि…आदि…..

राजनीति पेशा वर्ग———————–

-चाहे कितना भी चरित्रहीन हो

-चाहे हजार मुकदमे चल रहे हों

-शैक्षिक योग्यता की कोई जरूरत नहीं

-लूला, लंगड़ा, अंधा, बहरा, डिफेक्टेड, रिजेक्टेड सब मान्य हैं

-कोई परीक्षा, इंटरव्यू या शारीरिक दक्षता मानक पूरा करने की जरूरत नहीं

-मरते दम तक चुनाव लड़ने की आजादी

-नो रिटायरमेंट

-संवैधानिक पद पर रहते हुए संवैधानिक मर्यादाओं का पालन करना अनिवार्य नहीं

-नगर पालिका से लेकर संसद तक में सदन के अध्यक्ष के आदेश और अपील को मानना जरूरी नहीं

-अपने सीएम, पीएम राज्यपाल और राष्ट्रपति को जो मन में आए कह देने की आजादी

-अपने देश या राज्य की सरकार के खिलाफ जी भरकर कुछ भी कहने, आरोप लगाने की आजादी

-1 बार भी MLA, MLC, MP बन जाने पर जीवनभर पेंशन और भत्ता की सुविधा

आदि….आदि…..आदि….

(यह पत्रकार/लेखक के निजी विचार हो सकते हैं)

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