March 25, 2019
ऑफबीट

अजीब चुनाव: वोटिंग से पहले ही हो जाता है जीत का ऐलान, मतपत्र पर होता है एक ही नाम

नई दिल्ली: भारत के लोकतांत्रिक देश है. जहाँ वोट डालकर जनता अपने प्रतिनिधि चुनती है जोकि विधानसभाओं और संसद में बैठकर उनके मुद्दे उठाते हैं. भारत लोकतांत्रिक ही नहीं बल्कि दुनिया का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक देश का अभी औहदा रखता है. रविवार को ही चुनाव आयोग ने आम चुनाव की घोषणा की है. एल्कैं अज दुनिया के एक ऐसे देश के चुनाव प्रणाली को लेकर बता रहे हैं जिसे जानकर चौंक जायेंगे.

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बतादें कि अज बात कर रहे हैं उत्तर कोरिया की, नाम सुनते ही आपके दिमाग में एक मोटे, गाल फूले हुए आदमी का चेहरा घूमने लगा होगा. जिसने पिछले ही साला पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खीचा था. अमेरिका जैसे देश को बम से उड़ाने की धमकी और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को अपशब्द तक बोल देने वाले किंग जोंग को कौन नहीं जानता है. पिछले साल ही भारत की मीडिया ने किम जोंग को इतनी कवरेज दी, जितनी तो उसे खुद के देश में नहीं मिली होगी. लेकिन आज बात कर रहे हैं उत्तर कोरिया के चुनाव प्रणाली की. दरअसल उत्तर कोरिया में तानाशाही का दौर आज भी चला आ रहा है. किम कैसे देश का तानाशाह और प्रमुख शासक बना उसका इतिहास काफी खौफनाक है. लेकिन फिर भी इस देश में कथित रूप से चुनाव होता है.

यहां भी हर पांच वर्ष में ‘सुप्रीम पीपुल्स असेंबली’ के चुनाव कराए जाते हैं. रविवार को ही यहां मतदान कराया गया. यहाँ देश के नेता और शासक किम जोंग-उन की ‘डेमोक्रेटिक पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ कोरिया’ काफी मजबूती के साथ उभरी हुई है. लेकिन यह चुनाव महज एक दिखावा ही है. यहाँ के मतदान के दौरान हर मतपत्र पर केवल एक ही स्वीकृत नाम होता है. मतदाता मत डालने से पहले नाम को काट सकते हैं लेकिन कोई ऐसा करता नहीं है. यहं वोट तो सबही लोग डालते हैं लेकिन उनके पास चॉइस का अधिकार नहीं होता है. चुनाव अधिकारी को कयोंग हाक ने 3.26 प्योंगयांग केबल फैक्ट्री में एक मतदान केंद्र के बाहर कहा, ‘हमारा एक ऐसा समाज है जहां लोग एकमत होकर शीर्ष नेता के सम्मान में एकत्रित होते हैं.’

उन्होंने कहा हम शीर्ष नेता को मजबूत करते हैं और ऐसा कोई नहीं है जो शीर्ष नेता को नकार सके. दरअसल दुनियाभर के कई ऐसे देश हैं जहाँ तानाशाही आज भी जारी है. दुनिया 21वीं सदी में जी रही है, लेकिन यह देश आज भी लोगों को गुलामी की जंजीरों में जकड़े हुए हैं. उसका जीता जागता उदाहरण भारत के कई पडोसी मुल्क भी हैं. जहाँ लोकतंत्र नाम का कुछ है ही नहीं. हमे इस बात की ख़ुशी होनी चाहिए कि देश मिओं कैसे भी नेता हों. ऐसा भी माहौल हो… कम से कम हमे वोट देने और मनपसंद उम्मीदवार चुनने का अधिकार तो मिला है, जोकि हमे संविधान ने दिया हुआ है.

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