March 26, 2019
शिक्षा

‘UPSC की परीक्षाओं से गायब हो रहे हैं हिंदी मीडियम के उम्मीदवार’  

नई दिल्ली: संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) द्वारा आयोजित होने वाली सिविल सर्विस एग्जाम (CSE) में लगातार हिंदी मीडियाम वाले उम्मीदवारों की कमी होती जा रही है. साल 2011 से लगातार हिंदी मीडियम के उम्मीदवार कम होते जा रहे हैं.

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बतादें कि इंडियन एक्सप्रेस की खबर के मुताबिक संघ लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित होने वाली सिविल सर्विस एग्जाम यानी की CSE में पिछले कुछ सालों से हिंदी उम्मीदवारों का सेलेक्शन न के बराबर रह गया है. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार मसूरी के लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासनिक अकादमी (LBNSAA) में ट्रेनिंग ले रहे 370 अधिकारियों में से सिर्फ 8 ने सिविल सर्विस की परीक्षा हिंदी में दी थी. खबर के मुताबिक, 2011 के बाद से ही हिंदी में सिविल सर्विस परीक्षा पास करने वाले उम्मीदवारों की संख्या में गिरावट दर्ज की गई है. यहीं नहीं, सिविल सर्विस में चयन हिंदी मीडियम यूनिवर्सिटी से आने वाले उम्मीदवारों की संख्या भी लगातार कम होती जा रही है.

वहीँ हिंदी के उल्ट अंग्रेजी वालों की संख्या लगातार बढ़ रही है. राष्ट्रिय प्रशासनिक अकादमी की वेबसाइट पर मौजूद चयनित उम्मीदवारों की लिस्ट के अनुसार यह पता चलता है कि 2013 हिंदी माध्यम से सिविल सेवा परीक्षा पास करने वाले 17 प्रतिशत थे. वहीँ साल 2014 में यह आंकड़ा 2.11 प्रतिशत रह गया, साल 2015 में 4.28 प्रतिशत, 2016 में 3.45 प्रतिशत, 2017 में 4.06 प्रतिशत पहुँच गया. लेकिन 2018 में हिंदी मीडियम से चयनित उम्मीदवारों की संख्या मात्र 2.16 प्रतिशत ही रह गयी.

दरअसल साल 2011 में सरकार ने सीसैट (CSAT) लाने का ऐलान किया था. जिसके बाद 2013 में सिविल सर्विस मेन परीक्षा में भी बदलाव किया गया था. दो वैकल्पिक विषयों की बजाय एक विषय को विकल्प के तौर पर छात्र चुन सकते थे. इस के बड़ा देश भर मिएँ बड़े पैमाने पर प्रदर्शन भी हुआ था, लेकिन वह सब नाकाफी रहा. ऐसे में सिविल सर्विस की परीक्षाओं से हिंदी मीडियाम के उम्मीदवारों का गायब होना असहज करने वाली बात है.

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