June 19, 2019
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अबकी बार काशी नहीं है आसान: प्रियंका दे सकती हैं मोदी को टक्कर…

डेस्क: कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने गुरुवार को रायबरेली में वाराणसी सीट से लोकसभा चुनाव लड़ने का संकेत देकर बीजेपी सहित कई राजनीतिक हडकंप मचा दिया है. भले ही कांग्रेस पार्टी के लिए वाराणसी सीट जीतना आसान न हो लेकिन जिस लहजे में प्रियंका गाँधी ने कहा है उससे कार्यकर्ताओं में नया उत्साह जरूर भर दिया है.

दरअसल पीएम नरेंद्र मोदी ने 2014 में काशी यानी की वाराणसी से चुनाव लड़ा और बड़ी जीत हासिल की. लेकिन साल 2019 में उनके लिए इतना आसन नहीं रहा है, पहला की वोटरों की संख्या बढ़ना दूसरा की, विपक्षी दलों का एकीकरण जैसा की 2014 के लोस्कभा चुनाव से पहले बीजेपी ने किया था. करीब 29 दलों से बने एनडीए ने कांग्रेस को चारो ओर से नुकसान पहुंचाया और 44 की संख्या पर समेट दिया.

इसबार बीजेपी को सबसे ज्यादा अंदरखाने से चिंता प्रियंका गाँधी से ही है. भले ही यह बात सार्वजनिक रूप से नहीं कही जाती रही हो. लेकिन बीजेपी में टेंशन है क्योंकि इसबार मुद्दे नहीं हैं. विकास विकास की बातें जनता खूब समझती है… रोजगार , महंगाई और अर्थव्यवस्था जिसे मुद्दों पर बीजेपी सरकार कितने भी कागजी आंकड़े दिखा ले लेकिन हकीकत कुछ और ही है. ऐसे में बीजेपी को चुनौती मिला स्वाभाविक है. माना जा रहा है और इसबात के संकेत भी है कि आने वाले समय में प्रियंका गाँधी चुनाव लड़ सकती हैं. तो वह कौन सी सीट चुनेंगी.

दरअसल कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने गुरुवार को लोकसभा चुनाव लड़ने के संकेत देकर राजनीतिक दलों की धड़कनों को बढ़ा दिया है. प्रियंका गांधी से रायबरेली में पार्टी कार्यकर्ता ने चुनाव लड़ने की मांग की तो उन्होंने पलटकर कार्यकर्ताओं से ही पूछ लिया कि वाराणसी से चुनाव लड़ूं क्या? इससे यह कहा जा सकता है कि अगर वाराणसी से प्रियंका गाँधी मैदान में उतरी हैं तो यह मुकाबला मोदी बनाम प्रियंका के बीच हो सकता है. हालाँकि कांग्रेस पार्टी ऐसी गलती नहीं करेगी. इन दिनों कांग्रेस महासचिव और पूर्वी उत्तर प्रदेश की कांग्रेस प्रभारी प्रियंका गाँधी वाड्रा उत्तर प्रदेश दौरे पर हैं. बुधवार को प्रियंका ने अमेठी का दौरा किया था.

वहीं गुरुवार को वो पूरे दिन रायबरेली में रहीं. जहाँ कार्यकर्ताओं द्वारा चुनाव लड़ने की मांग पर प्रियंका गांधी ने कहा कि वाराणसी से लड़ जाऊं क्या? प्रियंका का इतना कहना था कि कांग्रेस कार्यकर्ताओं का जोश दोगुना हो गया और वो प्रियंका गांधी जिंदाबाद के नारे लगाने लगे. दरअसल वाराणसी महज एक सीट नहीं है वह देश के पीएम नरेंद्र मोदी की संसदीय सीट है. वहीँ बीजेपी का वाराणसी किला इतना मजबूत है कि उसे हिला पाना मुश्किल है. लेकिन लोकतंत्र में सारा हिसाब जनता ही करती है तो इससे कोई गुरेज नहीं कि राजनीति में मात खाना कोई बड़ी बात नहीं है. वैसे अगर वाराणसी में कांग्रेस पार्टी का संगठन देखा जाए तो प्रियंका के चुनाव लड़ने की संभावना न के बराबर है.

खासकर वाराणसी से. वाराणसी में कांग्रेस शून्य से भी नीचे कही जा सकती है. न कोई पदाधिकारी सक्रीय है और न ही कैडर मजबूत है. इन हालातों में प्रियंका गांधी वाड्रा को वाराणसी में बड़ी चुनौती का सामना करना पड़ सकता है. यह बात अलग है कि एक समय वाराणसी में कांग्रेस की धाक जमी हुई थी. लेकिन समय के साथ यह सीट बीजेपी आरक्षित हो गयी. मंदिर आन्दोलन के बाद 2004 में यह सीट कांग्रेस के खाते में गयी लेकिन उससे पहले और बाद में यह सीट बीजेपी के पास ही रही है. वाराणसी से 1991,1996,1998, 1999 में बीजेपी के प्रत्याशी यहां से जीतते रहे. 2009 में यहां से बीजेपी के मुरली मनोहर जोशी सांसद चुने गए और 2014 नरेंद्र मोदी चुने गये. ऐसे में वाराणसी सीट पर कांग्रेस का मुकाबला किसी प्रत्याशी भर से नहीं माना जा रहा है.

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यहाँ कांग्रेस को पूरी बीजेपी से लड़ना होगा. वाराणसी की पांच विधानसभा सीटों में कांग्रेस का कोई भी प्रतिनिधि नहीं है. जिससे यह लड़ाई और भी कठिन हो जाती है. मतलब यह है कि वाराणसी में कांग्रेस पार्टी को पहले जमीन मजबूत करने के लिए समय देना होगा. क्योंकि जब कार्यकर्त्ता ही निष्क्रिय हो चुके हैं तो पार्टी का झंडा कौन उठाएगा. वहीँ प्रियंका गांधी वाड्रा ने चुनाव प्रचार की कमान ही लोकसभा चुनाव की घोषणा होने के बाद उठायी है. ऐसे में वाराणसी के एक पक्के कांग्रेसी ने यह तक कह दिया है कि कांग्रेस को वाराणसी सीट पर अपनी ऊर्जा और समय खर्च करने से अच्छा है कि बाकी की अन्य सीटें जो (जिताऊ) हैं. उनपर समय देना चाहिए. क्योंकि यहाँ कांग्रेस को जमीन मजबूत करने में लंबा समय लगेगा.

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