Sonam Wangchuk News- लद्दाख के सामाजिक कार्यकर्ता और शिक्षाविद सोनम वांगचुक की हिरासत को लेकर केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कड़ा रुख अपनाया है। सरकार ने अदालत में दलील दी कि वांगचुक के भाषण और गतिविधियां राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बन सकती थीं और उनसे लद्दाख में “नेपाल और बांग्लादेश जैसे हालात” पैदा होने की आशंका थी।
केंद्र सरकार का पक्ष
सुनवाई के दौरान केंद्र की ओर से कहा गया कि सोनम वांगचुक के बयान सामान्य विरोध तक सीमित नहीं थे, बल्कि उनका असर क्षेत्रीय स्थिरता, कानून-व्यवस्था और संवेदनशील सीमावर्ती हालात पर पड़ सकता था।
सरकार ने उनकी हिरासत को निवारक और जरूरी कदम बताते हुए कहा कि समय रहते कार्रवाई करना आवश्यक था।
लद्दाख को बताया संवेदनशील इलाका
केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को यह भी बताया कि लद्दाख एक रणनीतिक और सीमावर्ती क्षेत्र है, जहां किसी भी प्रकार के भड़काऊ या उकसाने वाले भाषण गंभीर परिणाम ला सकते हैं।
सरकार के मुताबिक, ऐसे बयानों से सामाजिक असंतोष बढ़ सकता है, जिसका सीधा असर राष्ट्रीय सुरक्षा पर पड़ सकता है।
सोनम वांगचुक की ओर से क्या दलील दी गई
वांगचुक की ओर से पेश वकीलों ने तर्क दिया कि उनके भाषण शांतिपूर्ण थे और वे संविधान द्वारा दिए गए अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के दायरे में आते हैं।
उनका कहना है कि वांगचुक लद्दाख के पर्यावरण, स्थानीय अधिकारों और भविष्य को लेकर लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रख रहे थे।
समर्थकों का दावा
सोनम वांगचुक के समर्थकों का कहना है कि सामाजिक और पर्यावरणीय मुद्दों पर उठाई गई आवाज़ को राष्ट्रीय सुरक्षा से जोड़ना अनुचित है। उनके अनुसार, यह मामला असहमति और लोकतांत्रिक अधिकारों से जुड़ा हुआ है।
सुप्रीम कोर्ट में अगली सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद मामले को अगली सुनवाई के लिए सूचीबद्ध कर दिया है। फिलहाल यह केस अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता बनाम राष्ट्रीय सुरक्षा की बहस के केंद्र में बना हुआ है।
लद्दाख, सोनम वांगचुक और केंद्र सरकार के बीच यह विवाद आने वाले दिनों में न सिर्फ कानूनी बल्कि राजनीतिक रूप से भी अहम मोड़ ले सकता है। इस मामले पर देशभर की निगाहें सुप्रीम कोर्ट के अगले फैसले पर टिकी हैं।