RSS News : हिंदू होने पर शर्म कैसी? संघ प्रमुख ने जताई चिंता उन लोगों पर जो अपनी पहचान भूल चुके हैं

मुंबई:

RSS News : राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत ने हिंदू पहचान और उसकी विविधता पर अपनी सोच साझा की। उन्होंने कहा कि हिंदू होना गर्व की बात है, शर्म की नहीं, और साथ ही उन लोगों पर चिंता जताई जिन्होंने अपनी हिंदू पहचान को भूल लिया है।

भागवत ने हिंदुओं को चार श्रेणियों में बांटा

  1. हिंदू होने पर गर्व- जो खुले तौर पर गर्व से कहते हैं, “हम हिंदू हैं।”
  2. तटस्थ हिंदू – जो कहते हैं, “हम हिंदू हैं तो हैं, गर्व की क्या बात है।”
  3. संकोची हिंदू – जो धीरे-धीरे या केवल निजी तौर पर स्वीकार करते हैं कि वे हिंदू हैं।
  4. भूल चुके/भुलाए गए हिंदू – वे लोग जिनकी पहचान या आत्म-बोध कमजोर हो गया है या जिन्हें समाज में अपनी पहचान खोने की स्थिति का सामना करना पड़ रहा है।

मोहन भागवत ने विशेष रूप से चौथे समूह पर चिंता जताई। उनका कहना था कि कुछ लोग अपनी हिंदू पहचान भूल चुके हैं और ऐसी परिस्थितियां बन रही हैं कि और लोग भी अपनी सांस्कृतिक और धार्मिक पहचान भूल सकते हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि हिंदू पहचान केवल धर्म का नाम नहीं है, बल्कि यह भारत की सभ्यता, संस्कृति और मूल्य प्रणाली का प्रतीक है। संघ प्रमुख ने इस अवसर पर यह भी जताया कि यदि समाज में हिंदू चेतना कमजोर पड़ती है तो यह राष्ट्रीय एकता और सामाजिक स्थिरता के लिए चुनौती बन सकती है।

journalist india Tabloid

जनता और विशेषज्ञों की प्रतिक्रिया

मोहन भागवत के इस बयान पर जनता और विशेषज्ञों में मिश्रित प्रतिक्रिया देखने को मिली। कुछ लोग इसे सकारात्मक संदेश मान रहे हैं, जो लोगों में अपनी सांस्कृतिक पहचान को याद करने की प्रेरणा देता है। वहीं कुछ आलोचक इसे धार्मिक पहचान पर ध्यान केंद्रित करने वाला और संभावित रूप से विभाजनकारी दृष्टिकोण मानते हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि यह बयान आज के सामाजिक और राजनीतिक विमर्श में पहचान और आत्म गौरव पर बहस को नई दिशा देता है।

मोहन भागवत का यह बयान हिंदू पहचान की विविधताओं को उजागर करता है। वह बताते हैं कि समाज में कुछ लोग अपनी पहचान से जुड़े हैं और गर्व महसूस करते हैं, कुछ इसे तटस्थ रूप से देखते हैं, और कुछ इसे भूल चुके हैं। संघ प्रमुख का संदेश साफ है हिंदू होने पर शर्म नहीं, गर्व की आवश्यकता है, और यह चेतावनी भी कि पहचान की उपेक्षा से समाज में अस्थिरता बढ़ सकती है।

 

Mohan BhagwatRSS News
Comments (0)
Add Comment