9 जून 2024 दिन रविवार को जिस वक्त देश की राजधानी दिल्ली में मोदी सरकार 3.0 के शपथग्रहण के लिए देश-विदेशों से मेहमान इकट्ठा हो रहे थे, उसी वक्त जम्मू कश्मीर में आतंकियों ने श्रद्धालुओं से भरी बस को गोलियों से भून डाला। इस आतंकी हमले में 10 श्रद्धालुओं की मौत हो गई है, जबकि मौत का आंकड़ा बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।
बता दें कि रविवार 9 जून को मोदी के शपथ ग्रहण से एक घंटा पहले करीब सवा 6 बजे जम्मू-कश्मीर के रियासी में आतंकियों ने श्रद्धालुओं से भरी बस पर हमला कर दिया। इस आतंकी हमले में ड्राइवर और कंडक्टर समेत 10 लोगों की मौत हो गई है, जबकि 40 से ज्यादा घायल बताए जा रहे हैं।
कब और कैसे हुआ हमला?
Journalist India को ग्राउंड जीरो से मिली जानकारी के मुताबिक, रविवार को श्रद्धालुओं से भरी एक बस पर जम्मू कश्मीर के रियासी जिले में आतंकियों ने हमला कर दिया। आतंकी हमले के बाद अनियंत्रित होकर बस पलट गई और गहरी खाई में जा गिरी।
स्थानीय लोगों के प्राप्त जानकारी के मुताबिक, तीर्थयात्रियों से भरी बस शिव खोड़ी मंदिर के पास रानसू से जम्मू के कटरा माता वैष्णो देवी के दर्शन के लिए जा रही थी। जम्मू-कश्मीर के नंबर वाली इस बस में कई तीर्थयात्री सवार थे। रियासी की एसएसपी मोहिता शर्मा के मुताबिक, बस में सवार कोई भी यात्री स्थानीय नहीं था।
सेना जैसी वर्दी में थे आतंकी !
एक घायल यात्री ने बताया कि आतंकियों के सेना जैसी वर्दी पहन रखी थी और मुंह पर लाल कपड़ा बांध रखा था। जैसे ही बस मोड़ पर आई, उन्होंने फायरिंग शुरू कर दी। अचानक हुए हमले से बस अनियंत्रित हो गई और खाई जा गिरी। उसने बताया कि आतंकियों ने करीब 25-30 राउंड फायरिंग की थी।
घायलों से अस्पताल में मिले राज्यपाल
वहीं, जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने जम्मू के सरकारी अस्पताल में रियासी आतंकी हमले के घायलों से मुलाकात की और उनका हालचाल जाना।
इस आतंकी संगठन ने ली हमले की जिम्मेदारी
जम्मू कश्मीर के रियासी में हुए आतंकी हमले की जिम्मेदारी पाकिस्तान समर्थित आतंकी संगठन द रेजिस्टेंस फ्रंट (TRF) ने ली है। इसके अलावा TRF ने ऐसे ही कई और आतंकी हमले करने की भी धमकी दी है। हमले के बाद सुरक्षा एजेंसियां चौकन्नी हो गई हैं और आतंकियों की धर-पकड़ के लिए सर्च ऑपरेशन भी तेज कर दिया है। सेना के अधिकारी हेलिकॉप्टर से इलाके की निगरानी भी कर रहे हैं। हालांकि, अभी तक कुछ संदिग्ध नहीं दिखा है। इसके अलावा सर्च ऑपरेशन के लिए बनाई गई टीम ने हमलावरों को घने जंगल में ढूंढने के लिए ड्रोन का भी सहारा लिया।
तीन दशक बाद कश्मीर में दूसरा बड़ा हमला
गौरतलब है कि जम्मू कश्मीर के करीब तीन दशक बाद दूसरी ऐसा बड़ा आतंकी हमला हुआ है। इससे पहले 10 जुलाई 2017 को अनंतनाग में आतंकियों ने अमरनाथ यात्रा के दौरान तीर्थयात्रियों से भरी बस पर गोलियां बरसाईं थीं। इस हमले में 7 श्रद्धालुओं की मौत हो गई थी, जबकि 19 घायल हो गए थे।