West Bengal: भारतीय पुलिस सेवा के पूर्व अधिकारी आर. एन. रवि ने कोलकाता के लोक भवन में आयोजित एक समारोह में पश्चिम बंगाल के 22वें राज्यपाल के रूप में शपथ ग्रहण की। कलकत्ता हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश सुजॉय पॉल ने उन्हें पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। इस मौके पर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, विधानसभा अध्यक्ष बिमान बनर्जी, कोलकाता के मेयर फिरहाद हाकिम और वाम मोर्चा के अध्यक्ष बिमान बोस समेत कई प्रमुख नेता मौजूद रहे। हालांकि समारोह में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का कोई नेता शामिल नहीं हुआ।
कार्यक्रम में मुख्य सचिव नंदिनी चक्रवर्ती सहित कई वरिष्ठ प्रशासनिक और पुलिस अधिकारी भी उपस्थित रहे। दरअसल, 5 मार्च को पूर्व राज्यपाल सी. वी. आनंद बोस के इस्तीफे के बाद आर. एन. रवि को पश्चिम बंगाल का नया राज्यपाल नियुक्त किया गया था। इससे पहले वे नगालैंड, मेघालय और तमिलनाडु के राज्यपाल रह चुके हैं।
1976 बैच के आईपीएस अधिकारी
आर. एन. रवि का जन्म पटना, बिहार में हुआ था। उन्होंने 1974 में भौतिकी विषय में स्नातकोत्तर की डिग्री हासिल की और 1976 में भारतीय पुलिस सेवा (IPS) में शामिल हुए। अपने करियर के दौरान उन्होंने देश के कई हिस्सों में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं।
उन्होंने केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) में भी काम किया और संगठित अपराध से जुड़े गिरोहों के खिलाफ कई भ्रष्टाचार विरोधी अभियानों का नेतृत्व किया। इसके अलावा उन्होंने इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) और गृह मंत्रालय, भारत सरकार में भी सेवाएं दीं। इस दौरान उन्होंने जम्मू-कश्मीर, पूर्वोत्तर भारत और माओवादी प्रभाव वाले क्षेत्रों में सुरक्षा और खुफिया कार्यों से जुड़े अहम दायित्व निभाए।
संघर्ष समाधान में निभाई महत्वपूर्ण भूमिका
आर. एन. रवि ने जातीय विद्रोह से प्रभावित क्षेत्रों में शांति स्थापित करने और संघर्षों को सुलझाने में भी अहम योगदान दिया। उन्होंने कई सशस्त्र विद्रोही संगठनों को मुख्यधारा में शामिल कराने की दिशा में काम किया। आतंकवाद से निपटने और खुफिया जानकारी साझा करने के क्षेत्र में भारत के अंतरराष्ट्रीय सहयोग को मजबूत बनाने में भी उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही। साल 2012 में सरकारी सेवा से सेवानिवृत्त होने के बाद उन्होंने राष्ट्रीय अखबारों में नियमित रूप से लेख लिखना शुरू किया।
नागा शांति वार्ता में निभाई बड़ी जिम्मेदारी
साल 2014 में केंद्र सरकार ने उन्हें नागा शांति वार्ता के लिए वार्ताकार (इंटरलोक्यूटर) नियुक्त किया। उन्होंने इस मुद्दे को व्यापक स्तर पर चर्चा में लाने और सभी हितधारकों को शामिल करने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रयास किए। इसके परिणामस्वरूप कई उग्रवादी संगठनों ने भारतीय संविधान और संघीय ढांचे के भीतर समाधान के लिए समझौतों पर हस्ताक्षर किए, जिससे नगालैंड और पूर्वोत्तर क्षेत्र में शांति स्थापित करने की दिशा में प्रगति हुई। बाद में अक्टूबर 2018 में उन्हें देश का उप राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (डिप्टी नेशनल सिक्योरिटी एडवाइजर) भी नियुक्त किया गया।