US Israel Iran War: अमेरिका और इजरायल के संयुक्त हमलों में ईरान के सुप्रीम लीडर Ali Khamenei और कई वरिष्ठ नेताओं की मौत के बाद क्षेत्र में तनाव चरम पर है। जवाबी कार्रवाई में ईरान ने इजरायल और अमेरिका से जुड़े सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया, जिनमें UAE, कतर, बहरीन और कुवैत शामिल बताए जा रहे हैं। साइप्रस में मौजूद ब्रिटिश सैन्य ठिकानों पर भी हमलों की खबरें सामने आईं।
इन घटनाक्रमों के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है, ईरान के पास मौजूद हथियारों का जखीरा कितना बड़ा है और क्या वह अपनी सैन्य क्षमता के दम पर इजरायल और अमेरिका के खिलाफ लड़ाई जारी रख सकता है? ईरान के राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian ने कहा है कि खामेनेई की मौत का बदला लेना देश का “कर्तव्य और कानूनी अधिकार” है। हालांकि, किसी भी लंबे संघर्ष की दिशा ईरान की सैन्य क्षमताओं पर निर्भर करेगी।
ईरान की सैन्य ताकत का आधार: मिसाइल प्रोग्राम
रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, ईरान का मिसाइल कार्यक्रम उसकी सैन्य शक्ति की रीढ़ है और मिडिल ईस्ट में सबसे विविध और व्यापक कार्यक्रमों में से एक माना जाता है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इसमें बैलिस्टिक और क्रूज़ दोनों तरह की मिसाइलें शामिल हैं, जो बिना आधुनिक वायुसेना के भी लंबी दूरी तक मार करने की क्षमता देती हैं।
ईरानी अधिकारियों का दावा है कि यह कार्यक्रम “डिटरेंस” यानी रोकथाम की रणनीति का हिस्सा है। वहीं आलोचकों का कहना है कि यह क्षेत्रीय अस्थिरता बढ़ा सकता है। ईरान की लंबी दूरी की कुछ बैलिस्टिक मिसाइलों की रेंज लगभग 2,000 से 2,500 किलोमीटर तक बताई जाती है, जिससे इजरायल और क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी ठिकाने निशाने पर आ सकते हैं। हालांकि, ये मिसाइलें सीधे अमेरिका की मुख्य भूमि तक नहीं पहुंचतीं।
कम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलें
कम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलों (150–800 किमी) को ईरान की “पहला प्रहार” क्षमता माना जाता है। फतेह सीरीज़, ज़ोल्फाघर, कियाम-1 और शहाब जैसे सिस्टम तेज़ और क्षेत्रीय हमलों के लिए डिजाइन किए गए हैं। इनकी कम चेतावनी अवधि विरोधी रक्षा तंत्र के लिए चुनौती पैदा कर सकती है, खासकर जब इन्हें एक साथ दागा जाए।
मध्यम दूरी की मिसाइलें
1,500 से 2,000 किलोमीटर तक मार करने वाली मध्यम दूरी की मिसाइलें क्षेत्रीय संघर्ष को बड़े संकट में बदलने की क्षमता रखती हैं। शहाब-3, इमाद, गदर-1, खोर्रमशहर और सेजिल जैसी मिसाइलें ईरान की लंबी दूरी तक मार करने की क्षमता दिखाती हैं। सेजिल जैसे सॉलिड-फ्यूल सिस्टम तेजी से लॉन्च किए जा सकते हैं, जिससे संभावित हमले की स्थिति में त्वरित तैनाती संभव हो जाती है। इन क्षमताओं के चलते कतर, बहरीन, कुवैत, सऊदी अरब और UAE में स्थित अमेरिकी और इजरायली हितों को जोखिम में माना जाता है।
क्रूज़ मिसाइलें और ड्रोन
बैलिस्टिक मिसाइलों के अलावा, ईरान के पास क्रूज़ मिसाइलों और ड्रोन का बड़ा भंडार भी बताया जाता है। सौमर, या-अली, कुद्स, होवेज़ेह और पावेह जैसी क्रूज़ मिसाइलें कम ऊंचाई पर उड़ने और इलाके का पीछा करने की क्षमता रखती हैं, जिससे इन्हें ट्रैक करना अपेक्षाकृत मुश्किल हो सकता है। कुछ रिपोर्ट्स में सौमर की रेंज 2,500 किमी तक बताई गई है।
ड्रोन अपेक्षाकृत सस्ते होते हैं और बड़ी संख्या में लॉन्च किए जा सकते हैं। रक्षा विश्लेषकों का मानना है कि मिसाइलों के साथ “वन-वे अटैक ड्रोन” का उपयोग एयर डिफेंस सिस्टम पर दबाव बनाने और एयरपोर्ट, बंदरगाह व ऊर्जा प्रतिष्ठानों को निशाना बनाने के लिए किया जा सकता है।
‘मिसाइल सिटी’ और अंडरग्राउंड नेटवर्क
ईरान ने वर्षों में भूमिगत सुरंगों, छिपे हुए ठिकानों और सुरक्षित लॉन्च साइट्स का नेटवर्क विकसित किया है, जिन्हें अक्सर “मिसाइल सिटी” कहा जाता है। इनका उद्देश्य बड़े हमलों के बाद भी लॉन्च क्षमता बनाए रखना है। विश्लेषकों का मानना है कि यही संरचना ईरान को लंबे समय तक संघर्ष जारी रखने की क्षमता दे सकती है, क्योंकि विरोधी ताकतों के लिए उसके पूरे मिसाइल ढांचे को जल्दी नष्ट करना आसान नहीं होगा।
कुल मिलाकर, ईरान की मिसाइल, क्रूज़ और ड्रोन क्षमताएं क्षेत्रीय संतुलन को प्रभावित करने की क्षमता रखती हैं। हालांकि, किसी भी लंबे युद्ध की दिशा केवल हथियारों पर नहीं, बल्कि कूटनीतिक, आर्थिक और अंतरराष्ट्रीय समर्थन जैसे कारकों पर भी निर्भर करेगी।