नई दिल्ली: जंतर-मंतर पर चल रहे आंदोलन के बीच शनिवार सुबह को बड़ा घटनाक्रम सामने आया, जब सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को दिल्ली पुलिस अस्पताल लेकर गई। पुलिस की ओर से प्रदर्शनकारियों को जंतर-मंतर खाली करने के निर्देश भी दिए गए, जिसके बाद पूरे घटनाक्रम को लेकर राजनीतिक और सामाजिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है।
जानकारी के अनुसार, सोनम वांगचुक पिछले कई दिनों से जंतर-मंतर पर आंदोलन का नेतृत्व कर रहे थे। इस दौरान उनकी तबीयत को लेकर भी लगातार चिंताएं जताई जा रही थीं। पुलिस का कहना है कि उनकी स्वास्थ्य स्थिति को देखते हुए उन्हें चिकित्सकीय जांच और उपचार के लिए अस्पताल ले जाया गया।
जंतर-मंतर पर मौजूद प्रदर्शनकारियों से प्रशासन ने निर्धारित नियमों का पालन करते हुए स्थल खाली करने की अपील की। इसके लिए मौके पर पर्याप्त संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया ताकि कानून-व्यवस्था बनी रहे और किसी प्रकार की अप्रिय घटना न हो।
दूसरी ओर, आंदोलन से जुड़े लोगों और समर्थकों ने पुलिस की इस कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे लोगों को हटाना लोकतांत्रिक अधिकारों के विपरीत है। वहीं प्रशासन का पक्ष है कि सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखना और प्रदर्शनकारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना उसकी जिम्मेदारी है।
इस घटनाक्रम के बाद सोशल मीडिया पर भी तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। कई लोगों ने पुलिस की कार्रवाई का समर्थन किया, जबकि कई अन्य ने इसे लोकतांत्रिक विरोध प्रदर्शनों पर सख्ती के रूप में देखा।
फिलहाल सोनम वांगचुक की स्वास्थ्य स्थिति पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं। वहीं जंतर-मंतर पर आंदोलन के भविष्य और प्रशासन के अगले कदम को लेकर भी स्थिति पर लगातार निगरानी रखी जा रही है। आने वाले समय में यह मामला राजनीतिक और सामाजिक बहस का महत्वपूर्ण विषय बना रह सकता है।