Rajasthan: वक्फ संपत्तियों के सत्यापन और डिजिटलीकरण अभियान में राजस्थान ने देशभर में बढ़त बना ली है। राज्य में अब तक वक्फ की अचल संपत्तियों से जुड़े 4,802 दावों को नामंजूर किया जा चुका है, जो किसी भी राज्य में सबसे अधिक है। राजस्थान में कुल 31 हजार से ज्यादा वक्फ अचल संपत्तियां दर्ज हैं, जिनमें से बड़ी संख्या की जांच और पुष्टि की प्रक्रिया अभी जारी है।
अब तक कितनी वक्फ संपत्तियों का हुआ सत्यापन?
मीडिया रिपोर्ट्स में सामने आए सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, देशभर में 8,72,802 वक्फ अचल संपत्तियां पंजीकृत हैं। इनमें से करीब 5,82,541 संपत्तियों का विवरण पोर्टल पर अपलोड किया जा चुका है। सत्यापन के दौरान दस्तावेजी खामियों, रिकॉर्ड में नाम दर्ज न होने और अन्य विसंगतियों के चलते 24,696 वक्फ दावों को खारिज किया गया है। इनमें राजस्थान सबसे आगे रहा है।
वक्फ दावे खारिज होने में टॉप-10 राज्य
| रैंक | राज्य | कुल वक्फ अचल संपत्तियां | खारिज वक्फ दावे |
|---|---|---|---|
| 1 | राजस्थान | 22,000 | 4,802 |
| 2 | तेलंगाना | 58,000 | 4,458 |
| 3 | महाराष्ट्र | 63,000 | 3,679 |
| 4 | पश्चिम बंगाल | 58,000 | 1,765 |
| 5 | उत्तर प्रदेश | 98,000 | 1,472 |
| 6 | केरल | 46,000 | 1,182 |
| 7 | मध्य प्रदेश | 27,000 | 1,178 |
| 8 | कर्नाटक | 58,000 | 1,166 |
| 9 | गुजरात | 27,000 | 998 |
| 10 | पंजाब | 26,000 | 223 |
राजस्थान में वक्फ दावों की मौजूदा स्थिति
राज्य में अब तक 23 हजार से अधिक वक्फ संपत्तियों का डेटा अपलोड किया जा चुका है। जांच के बाद 4,802 दावों को अस्वीकार किया गया, जबकि कई मामलों में मंजूरी की प्रक्रिया अभी लंबित है। अधिकारियों के अनुसार, जिन संपत्तियों के पक्ष में वैध दस्तावेज या राजस्व रिकॉर्ड नहीं मिले, उन्हें वक्फ संपत्ति के रूप में स्वीकार नहीं किया गया।
संशोधित वक्फ कानून लागू, बहस जारी
वक्फ संशोधन कानून को लेकर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर लगातार बहस चल रही है। विपक्ष का आरोप है कि पुराने कानून में वक्फ बोर्ड को अधिक अधिकार दिए गए थे, जिससे कई संपत्तियों पर मनमाने दावे किए गए। नए कानून में ट्रिब्यूनल प्रक्रिया में बदलाव, राज्य बोर्डों में महिलाओं और गैर-मुस्लिम सदस्यों की भागीदारी जैसे प्रावधान शामिल किए गए हैं। इस बीच, संशोधित कानून के कुछ प्रावधानों को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है। अंतरिम आदेश के तहत कुछ धाराओं के अमल पर रोक लगी है। फिलहाल जांच का अधिकार कलेक्टर स्तर पर बना हुआ है, जबकि किसी संपत्ति से बेदखली का अंतिम फैसला न्यायालय के आदेश के बाद ही होगा।