नेसेट में पीएम मोदी का संबोधन
संसद को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि इस ऐतिहासिक सदन में बोलना उनके लिए गर्व और सम्मान का विषय है। उन्होंने कहा कि वह न सिर्फ भारत के प्रधानमंत्री के रूप में, बल्कि एक प्राचीन सभ्यता के प्रतिनिधि के तौर पर दूसरी प्राचीन सभ्यता से संवाद कर रहे हैं। उन्होंने 1.4 अरब भारतीयों की ओर से दोस्ती, सम्मान और साझेदारी का संदेश दिया।
‘भारत मजबूती से इजरायल के साथ’
अपने भाषण में पीएम मोदी ने उल्लेख किया कि उनका जन्म 17 सितंबर 1950 को हुआ, वही दिन जब भारत ने आधिकारिक रूप से इजरायल को मान्यता दी थी। उन्होंने 7 अक्टूबर को हमास के हमले में जान गंवाने वालों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की और कहा कि भारत इजरायल के दर्द को समझता है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि भारत संकट की इस घड़ी में और आगे भी पूरे विश्वास के साथ इजरायल के साथ मजबूती से खड़ा रहेगा।
आतंकवाद पर दो-टूक
प्रधानमंत्री ने आतंकवाद के मुद्दे पर सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि कोई भी कारण निर्दोष लोगों की हत्या को जायज नहीं ठहरा सकता। उन्होंने कहा कि भारत स्वयं लंबे समय से आतंकवाद का सामना करता आया है और 26/11 मुंबई हमले की पीड़ा आज भी ताजा है।
पीएम मोदी ने कहा कि भारत और इजरायल दोनों की आतंकवाद के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति है, जिसमें किसी तरह का दोहरा मापदंड नहीं है। उन्होंने वैश्विक स्तर पर आतंकवाद के खिलाफ समन्वित और निरंतर कार्रवाई की आवश्यकता पर जोर दिया।
गाजा शांति पहल पर समर्थन
प्रधानमंत्री ने गाजा शांति पहल का भी समर्थन किया, जिसे संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की मंजूरी मिली है। उन्होंने कहा कि यह पहल क्षेत्र में स्थायी और न्यायसंगत शांति का रास्ता दिखाती है, जिसमें फिलिस्तीन मुद्दे का समाधान भी शामिल है। पीएम मोदी ने दोहराया कि भारत संवाद, शांति और स्थिरता के प्रयासों में इजरायल और अंतरराष्ट्रीय समुदाय के साथ खड़ा है। उन्होंने कहा कि शांति का मार्ग कठिन जरूर होता है, लेकिन समझदारी, साहस और मानवता के आधार पर ही स्थायी समाधान संभव है।