पीएम मोदी के दौरे के बीच अमेरिका का बड़ा कदम
प्रधानमंत्री की यात्रा के समानांतर अमेरिका ने एक अहम सामरिक निर्णय लिया है। जानकारी के मुताबिक, अमेरिका ने अपने अत्याधुनिक F-22 Raptor लड़ाकू विमानों को इजरायल में तैनात किया है। यह कदम ऐसे समय पर उठाया गया है जब क्षेत्र में ईरान को लेकर तनाव बढ़ा हुआ है। रिपोर्ट्स बताती हैं कि इजरायल के नेगेव रेगिस्तान स्थित ओवदा एयरबेस पर अमेरिका के 11 एफ-22 रैप्टर जेट उतारे गए हैं। इसे ईरान पर दबाव बनाने की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह तैनाती संभावित सैन्य विकल्पों की तैयारी का संकेत भी हो सकती है।
F-22 रैप्टर क्यों है खास?
बताया जा रहा है कि यह पहली बार है जब अमेरिका ने बिना किसी संयुक्त सैन्य अभ्यास या प्रशिक्षण कार्यक्रम के सीधे ऑपरेशनल मकसद से इजरायल में अपने लड़ाकू विमान तैनात किए हैं। इससे अमेरिका-इजरायल के बढ़ते रक्षा सहयोग की झलक मिलती है। एफ-22 रैप्टर पांचवीं पीढ़ी का स्टील्थ फाइटर जेट है, जिसे दुनिया के सबसे एडवांस और घातक विमानों में गिना जाता है।
इसकी स्टील्थ तकनीक इसे दुश्मन के रडार से बचने में सक्षम बनाती है, जबकि सुपरक्रूज क्षमता और उन्नत हथियार प्रणाली इसे सटीक और तेज हमलों के लिए तैयार करती है। गौरतलब है कि अमेरिका ने इस विमान का निर्यात न तो इजरायल को किया है और न ही किसी अन्य देश को, जिससे इसकी रणनीतिक अहमियत और बढ़ जाती है।
भारत-इजरायल रक्षा सहयोग पर भी नजर
इस दौरे के दौरान भारत और इजरायल के बीच रक्षा सहयोग को और मजबूत किए जाने की संभावना है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारतीय सशस्त्र बल-खासकर थल सेना और वायु सेना, इजरायल से हेरॉन सीरीज के उन्नत ड्रोन लेने पर विचार कर रहे हैं। भारत पहले से हेरॉन-1 का उपयोग कर रहा है और अब सशस्त्र Heron Mk II ड्रोन की अतिरिक्त खरीद पर चर्चा हो रही है। ये ड्रोन सैटेलाइट से जुड़े होते हैं और दुश्मन के ठिकानों पर सटीक हमले करने में सक्षम हैं। सेना और वायु सेना पहले ही इन्हें ऑपरेट कर रही हैं, जबकि नौसेना भी पहली बार इन्हें शामिल करने की तैयारी में है।
नेसेट को संबोधित करेंगे पीएम मोदी
अपने दौरे के दौरान पीएम मोदी नेतन्याहू के साथ रणनीतिक मुद्दों पर चर्चा करेंगे, नेसेट को संबोधित करेंगे और भारतीय प्रवासी समुदाय से संवाद करेंगे। रवाना होने से पहले उन्होंने कहा कि भारत और इजरायल के बीच बहुआयामी और मजबूत रणनीतिक साझेदारी है, जो समय के साथ और गहरी हुई है। कुल मिलाकर, पीएम मोदी की यह यात्रा कूटनीति और रक्षा, दोनों मोर्चों पर अहम मानी जा रही है, जबकि अमेरिका की सैन्य तैनाती ने क्षेत्रीय समीकरणों को और संवेदनशील बना दिया है।