Jaish-e-Mohammed Roadshow: भारत विरोधी आतंकी संगठनों पर कार्रवाई के पाकिस्तान के तमाम दावों की एक बार फिर पोल खुल गई है। खैबर पख्तूनख्वा के स्वाबी और चारसद्दा जिलों के साथ-साथ सिंध प्रांत के नवाबशाह से सामने आई तस्वीरों और वीडियो ने शहबाज शरीफ सरकार को वैश्विक मंच पर कठघरे में खड़ा कर दिया है। इन इलाकों में प्रतिबंधित आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद ने खुलेआम सड़कों पर उतरकर भारत विरोधी रैलियां निकालीं, जिनमें आतंकी झंडे लहराते और उकसावे वाले नारे लगाते नजर आए। हैरानी की बात यह रही कि कई जगहों पर पाकिस्तानी पुलिस इन आतंकियों को सुरक्षा मुहैया कराती दिखी।
खैबर पख्तूनख्वा में जैश का खुला शक्ति प्रदर्शन
खैबर पख्तूनख्वा के चारसद्दा जिला मुख्यालय में जैश-ए-मोहम्मद के करीब 150 से ज्यादा प्रशिक्षित आतंकी और उनके कमांडर सैकड़ों मोटरसाइकिलों के काफिले के साथ रैली निकालते दिखाई दिए। आतंकियों ने जैश के झंडे लहराए और भारत के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। वीडियो में जैश के कमांडर को अपने लड़ाकों को संबोधित करते भी देखा गया। चारसद्दा से सामने आए 10 से अधिक वीडियो में यह भी देखा गया कि जैश ने अपने प्रचार के लिए छोटे बच्चों को नकली हथियार थमाकर रैली में शामिल किया। इन रैलियों के दौरान खैबर पख्तूनख्वा प्रांत की पुलिस की मौजूदगी और सुरक्षा व्यवस्था भी कैमरे में साफ कैद हुई।
स्वाबी और टोपी में भी भारत विरोधी रैली
चारसद्दा के अलावा जैश-ए-मोहम्मद ने खैबर पख्तूनख्वा के स्वाबी जिले के टोपी शहर में भी भारत विरोधी मार्च निकाला। हालांकि यहां आतंकियों के हाथों में झंडे नहीं थे, लेकिन रैली के आगे चल रहे स्पीकर पर जैश का झंडा लगा हुआ था। इस रैली को भी स्थानीय पुलिस की सुरक्षा प्राप्त थी। हर साल 5 फरवरी को पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में जैश इस तरह की रैलियां निकालता रहा है, लेकिन पिछले साल अगस्त में ऑपरेशन सिंदूर के बाद संगठन ने अपने आतंकी ठिकानों और ट्रेनिंग कैंप को खैबर पख्तूनख्वा में शिफ्ट कर दिया था, ताकि भारत की नजरों से बचा जा सके। 5 फरवरी को सामने आई ये गतिविधियां उसी रणनीति की पुष्टि करती हैं।
सिंध प्रांत में भी जैश का रोड शो
खैबर पख्तूनख्वा के साथ-साथ सिंध प्रांत के नवाबशाह शहर में भी जैश-ए-मोहम्मद ने सरेआम रोड शो किया। नवाबशाह के मोहनी बाजार इलाके में सैकड़ों मोटरसाइकिलों के साथ आतंकी जैश के झंडे लहराते हुए नजर आए। बताया जा रहा है कि नवाबशाह पिछले नवंबर से जैश का नया ठिकाना बन चुका है, क्योंकि संगठन का सरगना मौलाना मसूद अजहर बीते तीन महीनों से गुलाम रसूल कॉलोनी स्थित जामिया खदीजा उल तूबा में छिपा हुआ है।
इमरान खान की पार्टी के भीतर से भी आरोप
गौरतलब है कि पाकिस्तान सरकार ने जैश-ए-मोहम्मद को 14 जनवरी 2002 में ही प्रतिबंधित संगठन घोषित किया था, लेकिन जमीनी हकीकत इसके उलट दिखाई दे रही है। खैबर पख्तूनख्वा में इमरान खान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) की सरकार है। मौजूदा मुख्यमंत्री सोहेल अफरीदी और पूर्व मुख्यमंत्री अली अमीन गंडापुर कई बार आरोप लगा चुके हैं कि ISI और पाकिस्तानी सेना आतंकियों को प्रांत में बसाने में मदद कर रही है।
ताजा तस्वीरों में जिस तरह से सोहेल अफरीदी के नेतृत्व वाले प्रांत की पुलिस जैश-ए-मोहम्मद के आतंकियों को सुरक्षा देती नजर आई, उससे यह साफ होता है कि पाकिस्तान की मुख्यधारा की राजनीतिक पार्टियां चाहे वह नवाज शरीफ की PML-N हो, इमरान खान की PTI या बिलावल भुट्टो की PPP भारत विरोधी आतंकी संगठनों को न सिर्फ संरक्षण दे रही हैं, बल्कि उन्हें सुरक्षित रखने की कोशिशों में भी शामिल हैं।