NCERT Book Controversy: कोर्ट की सख्ती के बाद NCERT ने मांगी माफी, कक्षा 8 की किताब पार्ट-2 की बिक्री पर लगी रोक

NCERT Book Controversy: NCERT ने 8वीं क्लास की किताब में एक चैप्टर जोड़ा, जिस पर आपत्ति जताते हुए सुप्रीम कोर्ट ने स्वत: संज्ञान लिया। विवाद बढ़ता देखकर काउंसिल ने किताब की बिक्री पर रोक लगा दी और विवादित चैप्टर को हटाने का फैसला किया। साथ ही चैप्टर के लिए सुप्रीम कोर्ट से माफी भी मांगी है।

NCERT Book Controversy: National Council of Educational Research and Training (NCERT) ने कक्षा 8 की एक विवादित पाठ्यपुस्तक को लेकर बड़ा कदम उठाया है। परिषद ने किताब के भाग-2 की बिक्री पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। आधी रात जारी बयान में NCERT ने अपनी गलती स्वीकार करते हुए माफी मांगी और स्पष्ट किया कि ‘ज्यूडिशियल करप्शन’ से जुड़े अध्याय को जोड़ना अनजाने में हुई त्रुटि थी। परिषद ने भरोसा दिलाया कि भविष्य में ऐसी चूक नहीं होगी और संशोधित संस्करण ही विद्यार्थियों को उपलब्ध कराया जाएगा।

CJI सूर्यकांत की सख्त टिप्पणी

Supreme Court of India के प्रधान न्यायाधीश Surya Kant ने इस अध्याय पर स्वत: संज्ञान लेते हुए कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने NCERT को फटकार लगाते हुए कहा कि किसी भी संवैधानिक संस्था को बदनाम करने की अनुमति नहीं दी जा सकती। अदालत ने संकेत दिया कि मामले से निपटने के लिए उचित कदम उठाए जाएंगे।

दरअसल, 24 फरवरी 2026 को NCERT ने सामाजिक विज्ञान की पुस्तक Exploring Society: India and Beyond, Vol II में ‘हमारे समाज में न्यायपालिका की भूमिका’ शीर्षक से एक नया अध्याय (पृष्ठ 125-142) शामिल करने की घोषणा की थी। इस अध्याय के कुछ अंशों पर न केवल सुप्रीम कोर्ट, बल्कि शिक्षा मंत्रालय के स्कूल शिक्षा एवं साक्षरता विभाग ने भी आपत्ति जताई। विभाग ने ही अगली सूचना तक किताब की बिक्री रोकने का निर्देश दिया था।

किताबें बाजार से वापस

NCERT ने बताया कि संबंधित अध्याय को हटाकर पूरी पुस्तक की दोबारा समीक्षा और पुनर्लेखन किया जाएगा। परिषद के अनुसार, 22.5 लाख प्रतियां छापी गई थीं, जिनमें से 2,24,962 प्रतियां स्टॉक में बची थीं और उन्हें गोदाम में वापस मंगा लिया गया है। साथ ही, जिन 38 प्रतियों में विवादित अध्याय शामिल था, उन्हें भी वापस लेने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

परिषद ने दोहराया कि उसकी मंशा न्यायपालिका या किसी अन्य संवैधानिक संस्था की गरिमा को ठेस पहुंचाने की नहीं थी। संशोधित सामग्री के साथ पुस्तक को दोबारा प्रकाशित कर विद्यार्थियों के लिए उपलब्ध कराया जाएगा।

 

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