Mahashivratri 2026: सनातन परंपरा में भगवान शिव की आराधना के लिए महाशिवरात्रि का पर्व अत्यंत पावन और फलदायी माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन विधि-विधान से शिव उपासना करने पर जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का आगमन होता है। फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को यह पर्व मनाया जाता है, जिसे भगवान शिव और माता पार्वती के दिव्य विवाह का प्रतीक भी माना जाता है। वर्ष 2026 में महाशिवरात्रि 15 फरवरी को मनाई जाएगी। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि इस दिन भोलेनाथ सच्चे मन से की गई प्रार्थना अवश्य स्वीकार करते हैं।
शास्त्रों और पुराणों में भगवान शिव की महिमा का विस्तृत वर्णन मिलता है। उनके अनेक स्तोत्र और मंत्र प्रचलित हैं, लेकिन 108 नामों का जप विशेष रूप से शुभ और कल्याणकारी माना जाता है। आइए पढ़ते हैं शिव जी के 108 पवित्र नाम और जानें इनके जप की सही विधि।
भगवान शिव के 108 नाम
ॐ महाकाल नमः
ॐ रुद्रनाथ नमः
ॐ भीमशंकर नमः
ॐ नटराज नमः
ॐ प्रलयांकर नमः
ॐ चंद्रमौली नमः
ॐ डमरूधारी नमः
ॐ चंद्रधारी नमः
ॐ भोलेनाथ नमः
ॐ कैलाशपति नमः
ॐ भूतनाथ नमः
ॐ नंदराज नमः
ॐ नंदी सवारी नमः
ॐ ज्योतिर्लिंग नमः
ॐ मल्लिकार्जुन नमः
ॐ भीमेश्वर नमः
ॐ विषधारी नमः
ॐ बम भोले नमः
ॐ विश्वनाथ नमः
ॐ अनादिदेव नमः
ॐ उमापति नमः
ॐ गणपति नमः
ॐ ओंकारस्वामी नमः
ॐ ओंकारेश्वर नमः
ॐ त्रिशूलधारी नमः
ॐ शम्भु नमः
ॐ नीलकंठ नमः
ॐ महाकालेश्वर नमः
ॐ त्रिपुरारी नमः
ॐ त्रिलोकनाथ नमः
ॐ त्रिनेत्रधारी नमः
ॐ बर्फानी बाबा नमः
ॐ अमरनाथ नमः
ॐ केदारनाथ नमः
ॐ अर्धनारीश्वर नमः
ॐ जटाधारी नमः
ॐ जगतपिता नमः
ॐ मृत्युंजय नमः
ॐ नागधारी नमः
ॐ रामेश्वर नमः
ॐ सोमनाथ नमः
ॐ जोगीश्वर नमः
ॐ गौरीशंकर नमः
ॐ शिवाकांत नमः
ॐ महेश्वर नमः
ॐ संकटहारी नमः
ॐ पशुपति नमः
ॐ दक्षेश्वर नमः
ॐ मणिमहेश नमः
ॐ अनादि नमः
ॐ आशुतोष नमः
ॐ अचलेश्वर नमः
ॐ आदिनाथ नमः
ॐ देवदेवेश्वर नमः
ॐ प्राणनाथ नमः
ॐ शिवाय नमः
ॐ महादानी नमः
ॐ अभयंकर नमः
ॐ पातालेश्वर नमः
ॐ सर्पधारी नमः
ॐ त्रिलोकिनाथ नमः
ॐ हठयोगी नमः
ॐ नागेश्वर नमः
ॐ सर्वेश्वर नमः
ॐ उमाकांत नमः
ॐ त्रिकालदर्शी नमः
ॐ महादेव नमः
ॐ मुक्तेश्वर नमः
ॐ गिरिजापति नमः
ॐ भद्रेश्वर नमः
ॐ त्रिपुरांतक नमः
ॐ किरातेश्वर नमः
ॐ जागेश्वर नमः
ॐ वृषभवाहन नमः
ॐ भूतेश्वर नमः
ॐ बैद्यनाथ नमः
(इसी प्रकार शेष नामों का जप पूर्ण करें।)
कैसे करें 108 नामों का जप?
भगवान शिव के 108 नामों का जाप अत्यंत शक्तिशाली साधना माना जाता है। इसे तीन तरीकों से किया जा सकता है—
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मानसिक जप: मन ही मन स्मरण करना।
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उपांशु जप: धीमे स्वर में उच्चारण।
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वाचिक जप: स्पष्ट और श्रव्य उच्चारण के साथ जप।
जप से पहले स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें और किसी शांत स्थान पर आसन लगाएं। संभव हो तो शिवलिंग या भगवान शिव की प्रतिमा के सामने बैठें। 108 दानों वाली रुद्राक्ष माला का प्रयोग करें और “ॐ नमः शिवाय” मंत्र से शुरुआत करें।
हर नाम का उच्चारण श्रद्धा, भक्ति और एकाग्रता के साथ करें तथा उसके अर्थ का स्मरण करने का प्रयास करें। जप पूर्ण होने पर भगवान शिव को प्रणाम कर आभार व्यक्त करें। नियमित और सच्ची भावना से किया गया यह जप मानसिक शांति, सकारात्मक ऊर्जा और आध्यात्मिक उन्नति प्रदान करने वाला माना जाता है।
Disclaimer: यहां दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और परंपराओं पर आधारित है। इसका कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। Journalistindia.com एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।