यह विशेष यूनिट समुद्र के रास्ते सैन्य कार्रवाई करने के अलावा दूतावासों की सुरक्षा, संकट के समय नागरिकों को सुरक्षित निकालने और आपदा राहत जैसे अभियानों में भी दक्ष मानी जाती है। फिलहाल संकेत हैं कि अमेरिका जमीन पर सीधा हमला करने की योजना नहीं बना रहा है, लेकिन इस तैनाती से क्षेत्र में उसकी सैन्य ताकत निश्चित रूप से बढ़ेगी।
ताइवान के पास था युद्धपोत
USS Tripoli जापान में तैनात रहता है और हाल के दिनों में प्रशांत महासागर में गश्त कर रहा था। सैटेलाइट तस्वीरों के अनुसार यह जहाज हाल ही में ताइवान के पास देखा गया था, इसलिए मध्य-पूर्व तक पहुंचने में इसे एक सप्ताह से अधिक समय लग सकता है। इस समय क्षेत्र में पहले से अमेरिका के करीब 12 युद्धपोत मौजूद हैं, जिनमें USS Abraham Lincoln एयरक्राफ्ट कैरियर और कई डिस्ट्रॉयर शामिल हैं।
युद्ध के दौरान तैनात होने वाला यह दूसरा सबसे बड़ा अमेरिकी जहाज होगा। इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि अमेरिकी सेना ने ईरान के खार्ग द्वीप पर स्थित सैन्य ठिकानों को पूरी तरह तबाह कर दिया है। खार्ग द्वीप ईरान का प्रमुख तेल निर्यात टर्मिनल माना जाता है।
तेहरान में रैली के दौरान धमाका
ईरान की राजधानी तेहरान में भी हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं। शुक्रवार को फर्डौसी स्क्वायर में हजारों लोग फिलिस्तीन के समर्थन और इजरायल के विरोध में आयोजित वार्षिक कुद्स डे रैली में शामिल हुए थे। इसी दौरान इलाके में एक बड़ा धमाका हो गया। बताया गया कि इजरायल ने पहले ही फारसी भाषा में अपने एक्स अकाउंट के जरिए उस इलाके को खाली करने की चेतावनी दी थी, लेकिन ईरान में इंटरनेट सेवाएं काफी हद तक बाधित होने के कारण अधिकांश लोगों तक यह संदेश नहीं पहुंच पाया।
दोनों पक्षों के बीच हमले तेज
मौजूदा हालात में ईरान लगातार इजरायल और खाड़ी क्षेत्र के कुछ देशों पर मिसाइल और ड्रोन हमले कर रहा है। साथ ही उसने होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करने का दावा किया है, जहां से दुनिया की करीब 20 प्रतिशत तेल आपूर्ति गुजरती है। वहीं दूसरी ओर अमेरिका और इजरायल भी ईरान के सैन्य और रणनीतिक ठिकानों पर लगातार हमले कर रहे हैं।
अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ के अनुसार युद्ध शुरू होने के बाद से अब तक दुश्मन के 15,000 से ज्यादा लक्ष्यों को निशाना बनाया जा चुका है।इजरायल ने भी दावा किया है कि उसने पिछले 24 घंटों में 200 से अधिक ठिकानों पर हमले किए हैं और ईरान तथा उसके सहयोगियों के खिलाफ कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी।