Iran US Israel War: तेल संकट गहराया तो बदली नीति, अमेरिका ने रूसी तेल खरीदने की दी मंजूरी

Iran US Israel War: मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध और बढ़ती तेल कीमतों के बीच अमेरिका ने बड़ा फैसला लिया है। अमेरिका ने रूसी तेल पर लगे कुछ प्रतिबंधों में अस्थायी ढील देने का फैसला किया है। अमेरिकी सरकार ने उन देशों को सीमित समय के लिए अनुमति दी है कि वे समुद्र में फंसे रूसी तेल को खरीद सकें।

Iran US Israel War: मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी के बीच अमेरिका ने बड़ा फैसला लिया है। अमेरिकी प्रशासन ने उन देशों को अस्थायी छूट देने का निर्णय किया है जो समुद्र में फंसे रूस के तेल को खरीदना चाहते हैं। यह कदम ऐसे समय उठाया गया है जब ईरान से जुड़े संघर्ष के कारण वैश्विक ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता बढ़ गई है और तेल आपूर्ति को लेकर चिंताएं गहराने लगी हैं।

अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने घोषणा की है कि वह एक अस्थायी लाइसेंस जारी करेगा, जिसके तहत कुछ प्रतिबंधित रूसी कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों की बिक्री तथा डिलीवरी की अनुमति दी जाएगी। यह छूट सीमित अवधि के लिए होगी और इसका उद्देश्य वैश्विक बाजार में तेल की आपूर्ति को बनाए रखना है। प्रशासन का मानना है कि इससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में बढ़ती कीमतों पर कुछ हद तक नियंत्रण पाया जा सकेगा। दरअसल, होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ते जोखिम और ईरान से जुड़े तनाव के कारण तेल सप्लाई प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है।

भारत को भी मिल चुकी है राहत

इससे पहले अमेरिका ने भारत को भी रूसी तेल खरीदने के लिए 30 दिनों की अस्थायी छूट दी थी। रूस‑यूक्रेन युद्ध के बाद रूस पर कई सख्त आर्थिक प्रतिबंध लगाए गए थे, जिससे कई देशों के लिए रूसी तेल खरीदना कठिन हो गया था। हालांकि मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए अमेरिका ने सीमित राहत देने का फैसला किया है ताकि वैश्विक बाजार में आपूर्ति बनी रहे और कीमतों में ज्यादा उछाल न आए।

कीमतों को स्थिर रखने की कोशिश

अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप वैश्विक ऊर्जा बाजार को स्थिर बनाए रखने के लिए कदम उठा रहे हैं। उनके मुताबिक यह निर्णय तेल की कीमतों को नियंत्रित करने और बाजार में सप्लाई बढ़ाने के उद्देश्य से लिया गया है। सरकार का कहना है कि यह अनुमति केवल उसी रूसी तेल पर लागू होगी जो पहले से समुद्र में ट्रांजिट में है। इससे रूस को अतिरिक्त आर्थिक फायदा नहीं मिलेगा, क्योंकि उसकी अधिकतर कमाई तेल उत्पादन के दौरान लगाए जाने वाले करों से होती है।

वैश्विक बाजार पर असर की आशंका

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि मध्य-पूर्व में तनाव लंबे समय तक जारी रहता है, तो तेल की कीमतों में और बढ़ोतरी हो सकती है। ऐसे में अमेरिका का यह कदम वैश्विक ऊर्जा बाजार को स्थिर रखने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।

 

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