Iran New Supreme Leader: अमेरिका ने ‘ऑपरेशन Epic Fury’ के तहत अयातुल्ला अली खामेनेई की हत्या का दावा किया है। ईरान में सुप्रीम लीडर का पद सर्वोच्च होता है और रक्षा, विदेश नीति व न्यायपालिका समेत बड़े रणनीतिक फैसलों की अंतिम मुहर उसी के पास होती है। 86 वर्षीय खामेनेई 1989 से इस पद पर थे और वे इस्लामिक गणराज्य के संस्थापक अयातुल्ला रुहोल्लाह खुमैनी के उत्तराधिकारी बने थे। अब उनके निधन के बाद सवाल उठ रहा है कि सत्ता की बागडोर किसके हाथ में जाएगी।
ईरान के सामने दो रास्ते
- ईरान के संविधान के अनुच्छेद 111 के अनुसार, सुप्रीम लीडर की आकस्मिक मृत्यु या हत्या की स्थिति में तीन लोगों की एक कमेटी अस्थायी तौर पर जिम्मेदारी संभाल सकती है। इसमें न्यायपालिका प्रमुख, राष्ट्रपति और सर्वोच्च सुरक्षा परिषद का एक सदस्य शामिल होता है। इस फॉर्मूले के तहत राष्ट्रपति मसूद पजेशकियन, सुरक्षा परिषद से अली लारिजानी और न्यायपालिका प्रमुख गुलाम हुसैन मोहसेनी एजई संयुक्त रूप से कार्यभार संभाल सकते हैं।
- दूसरा विकल्प यह है कि एक नए सुप्रीम लीडर की औपचारिक नियुक्ति कर दी जाए। अमेरिकी अखबार The Wall Street Journal की रिपोर्ट के अनुसार, खामेनेई ने हाल में संभावित उत्तराधिकारियों के चार नाम सुझाए थे, ताकि किसी आपात स्थिति में उनमें से किसी एक को चुना जा सके।बताया जाता है कि सूची में अली लारिजानी का नाम प्रमुखता से था, जबकि खामेनेई के बेटे मोजतबा खामेनेई का नाम भी चर्चा में है।
सुप्रीम लीडर की नियुक्ति कैसे होती है?
ईरान में सुप्रीम लीडर का चयन 88 सदस्यीय विशेषज्ञों की परिषद करती है, जिसे आमतौर पर ‘असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स’ कहा जाता है। इसके सदस्य हर आठ साल में चुने जाते हैं। चयन की कोई तय समय-सीमा संविधान में दर्ज नहीं है, इसलिए प्रक्रिया तेज या लंबी—दोनों हो सकती है।
ईरान में जल्द बड़े राजनीतिक बदलाव- ट्रंप
इजरायल के साथ मिलकर अमेरिका लंबे समय से ईरान में इस्लामिक गणराज्य की व्यवस्था पर सवाल उठाता रहा है। Axios को दिए एक इंटरव्यू में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि ईरान में जल्द बड़े राजनीतिक बदलाव देखने को मिल सकते हैं। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि भविष्य के नेतृत्व को लेकर उनके पास स्पष्ट योजना है। खामेनेई के बाद ईरान में नेतृत्व परिवर्तन केवल संवैधानिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि क्षेत्रीय और वैश्विक राजनीति को प्रभावित करने वाला फैसला होगा। अंतरिम कमेटी या नए सुप्रीम लीडर की नियुक्ति, दोनों ही स्थितियों में आने वाले दिनों में तेहरान की राजनीति निर्णायक मोड़ पर रहेगी।