Iran Israel US War: दुनिया की सबसे ताकतवर सेना माने जाने वाले अमेरिका को ईरान के साथ जारी युद्ध में बड़ी चुनौती का सामना करना पड़ सकता है। पेंटागन के भीतर से लीक हुई एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि अगर लड़ाई इसी रफ्तार से चलती रही, तो अमेरिका के हथियारों का भंडार तेजी से खत्म हो सकता है। रिपोर्ट के मुताबिक राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पास हालात संभालने के लिए महज 10 दिन का समय बचा है, क्योंकि इसके बाद मिसाइलों और जरूरी सैन्य उपकरणों की भारी कमी हो सकती है।
10 दिन में खत्म हो सकता है मिसाइल स्टॉक
रक्षा विशेषज्ञों और सैन्य अधिकारियों का मानना है कि यदि ईरान के साथ युद्ध अगले 10 दिनों तक इसी तीव्रता से जारी रहा, तो अमेरिका के पास मिसाइलों की कमी हो सकती है। यूक्रेन और इजरायल को हथियार सप्लाई करने के कारण अमेरिकी सैन्य भंडार पहले ही काफी कम हो चुका है। ऐसे में लंबे समय तक युद्ध जारी रहने पर अमेरिका की अपनी सुरक्षा भी खतरे में पड़ सकती है।
उत्पादन में बड़ा अंतर
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के अनुसार, ईरान हर महीने 100 से अधिक मिसाइलें तैयार कर रहा है, जबकि अमेरिका केवल 6 से 7 इंटरसेप्टर मिसाइलें ही बना पा रहा है। उत्पादन की इस असमानता को रक्षा विशेषज्ञ बेहद चिंताजनक मान रहे हैं।
पेंटागन की चेतावनी
पेंटागन अधिकारियों और जॉइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के चेयरमैन जनरल डैन केन ने राष्ट्रपति ट्रंप को आगाह किया है कि अगर ईरान के साथ युद्ध लंबा खिंचता है, तो अमेरिका के हथियारों का स्टॉक तेजी से खत्म हो सकता है, जो देश की सुरक्षा के लिहाज से खतरनाक स्थिति पैदा कर सकता है।
इंटरसेप्टर मिसाइलों की कमी
सबसे बड़ा खतरा उन इंटरसेप्टर मिसाइलों पर मंडरा रहा है जो दुश्मन की मिसाइलों को हवा में ही नष्ट कर देती हैं।
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THAAD इंटरसेप्टर: पिछले साल ईरान के साथ तनाव के दौरान अमेरिका ने करीब 150 THAAD इंटरसेप्टर (लगभग 25%) इस्तेमाल कर लिए थे। अब इनका स्टॉक काफी कम हो चुका है।
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SM-3 मिसाइलें: जहाजों से दागी जाने वाली ये एंटी-बैलिस्टिक मिसाइलें पहले ही हूती विद्रोहियों और ईरान के खिलाफ अभियानों में काफी इस्तेमाल हो चुकी हैं।
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JDAM किट: साधारण बमों को ‘स्मार्ट बम’ में बदलने वाली GPS आधारित JDAM किट की भी कमी होने लगी है।
युद्ध का भारी खर्च
इस युद्ध पर अमेरिका को भारी आर्थिक बोझ भी उठाना पड़ रहा है।
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पहले 24 घंटे: शुरुआती दिन की सैन्य कार्रवाई पर करीब 779 मिलियन डॉलर (लगभग ₹6,900 करोड़) खर्च हुए।
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रोजाना खर्च: USS जेराल्ड आर फोर्ड जैसे एयरक्राफ्ट कैरियर को समुद्र में ऑपरेट करने पर रोज लगभग ₹58 करोड़ खर्च होते हैं।
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कुल अनुमान: अगर युद्ध 4 से 5 हफ्ते तक चला, तो अमेरिका को करीब 210 बिलियन डॉलर (करीब ₹18.87 लाख करोड़) तक खर्च करना पड़ सकता है।
ट्रंप का अलग दावा
जहां पेंटागन हथियारों की कमी को लेकर चिंता जता रहा है, वहीं राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर दावा किया है कि अमेरिका के पास हथियारों का भंडार पहले से कहीं ज्यादा मजबूत है और उसकी सप्लाई लगभग असीमित है। युद्ध के दौरान ईरान ने बहरीन, सऊदी अरब, कतर और यूएई में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया है। पेंटागन को आशंका है कि अगर इंटरसेप्टर मिसाइलों का भंडार खत्म हो गया, तो अमेरिका अपने ठिकानों और सहयोगी देशों को ईरान के मिसाइल हमलों से बचाने में मुश्किल महसूस कर सकता है।