पुराने ओएस बने साइबर हमलों की वजह
रिपोर्ट बताती है कि एंड्रॉयड 13 या उससे पुराने वर्जन पर काम कर रहे स्मार्टफोन अब सुरक्षित नहीं माने जा सकते। आमतौर पर कंपनियां 3 से 5 साल तक ही सिक्योरिटी पैच देती हैं। इसके बाद सॉफ्टवेयर में मौजूद खामियां खुली रह जाती हैं, जिन्हें हैकर्स आसानी से निशाना बनाते हैं। इन्हीं कमजोरियों के जरिए फोन में मैलवेयर या स्पायवेयर डाला जा सकता है।
किस एंड्रॉयड वर्जन पर कितने फोन?
दिसंबर तक के आंकड़ों के अनुसार, दुनिया में सिर्फ 7.5 फीसदी स्मार्टफोन ही एंड्रॉयड 16 पर चल रहे हैं। वहीं 19.3 फीसदी डिवाइस एंड्रॉयड 15, 17.9 फीसदी एंड्रॉयड 14 और 13.9 फीसदी फोन एंड्रॉयड 13 पर काम कर रहे हैं। इससे साफ है कि बड़ी संख्या में यूजर्स अभी भी पुराने एंड्रॉयड ओएस का इस्तेमाल कर रहे हैं, जिन्हें समय पर सुरक्षा अपडेट नहीं मिल पा रहे।
कितने फोन को मिल रहा है सिक्योरिटी सपोर्ट?
रिपोर्ट के मुताबिक, फिलहाल केवल करीब 58 फीसदी स्मार्टफोन ही ऐसे हैं जो सिक्योरिटी सपोर्ट के दायरे में आते हैं। इसके उलट, लगभग 40 फीसदी डिवाइस ऐसे हो चुके हैं जिनके लिए अब कोई नया सिक्योरिटी अपडेट जारी नहीं किया जा रहा। सिक्योरिटी अपडेट का काम पुराने ओएस में मौजूद बग्स और साइबर खामियों को ठीक करना होता है। इनके बिना फोन हैकिंग, डेटा चोरी और स्पायवेयर हमलों का आसान शिकार बन सकता है।
सुरक्षित रहने के लिए क्या करें?
गूगल ने एंड्रॉयड यूजर्स को सलाह दी है कि वे अपने स्मार्टफोन को लेटेस्ट एंड्रॉयड ओएस पर अपडेट रखें। अनजान या थर्ड-पार्टी ऐप्स इंस्टॉल करने से बचें और नियमित रूप से सिक्योरिटी पैच डाउनलोड करते रहें। अगर आपके फोन का आधिकारिक सपोर्ट बंद हो चुका है, तो जल्द से जल्द नए और अपडेट-सपोर्ट वाले डिवाइस पर स्विच करने पर विचार करें।
एंड्रॉयड बनाम आईफोन: सिक्योरिटी में फर्क
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि आईफोन यूजर्स को पुराने मॉडल्स पर भी लंबे समय तक iOS और सिक्योरिटी अपडेट मिलते रहते हैं। वहीं कई एंड्रॉयड स्मार्टफोन में 4–5 साल बाद सपोर्ट खत्म हो जाता है। हालांकि अब कुछ कंपनियां, जैसे गूगल और पिक्सल ब्रांड्स, अपने चुनिंदा डिवाइसेज के लिए लंबे समय तक सिक्योरिटी अपडेट देने का ऐलान कर चुकी हैं, जिससे एंड्रॉयड इकोसिस्टम में धीरे-धीरे सुधार देखने को मिल रहा है।