कम्युनिकेशन प्रोफेसर नेहा सिंह, जो पहले रोबोडॉग विवाद में भी चर्चा में रही थीं, का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल है। वीडियो में वह एक रिपोर्टर को “इन-हाउस सॉकर ड्रोन” की जानकारी देती नजर आती हैं। उनका कहना है कि इस ड्रोन की “एंड-टू-एंड इंजीनियरिंग” से लेकर इसके एप्लिकेशन तक का विकास विश्वविद्यालय परिसर में ही हुआ है। उन्होंने यह भी दावा किया कि कैंपस में भारत का पहला “ड्रोन सॉकर एरिना” तैयार किया गया है, जिसमें सिमुलेशन लैब और एप्लिकेशन एरिना शामिल हैं, और जहां इस उत्पाद को उन्नत फीचर्स के साथ विकसित किया जा रहा है।
ड्रोन सॉकर क्या है?
प्रोफेसर के दावों के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर यूज़र्स और टेक समुदाय ने आपत्ति जताई। कई लोगों ने कहा कि विश्वविद्यालय द्वारा दिखाया गया ड्रोन दक्षिण कोरिया की हेलसेल ग्रुप के उत्पाद से मिलता-जुलता है, जो बाजार में पहले से उपलब्ध है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह मॉडल skyballdrone.com पर उपलब्ध “Striker V3 ARF Professional Drone Soccer Set” जैसा प्रतीत होता है, जिसकी कीमत करीब 453 डॉलर (लगभग 40,800 रुपये) बताई गई है।
यह रिमोट-ऑपरेटेड क्वाडकॉप्टर ड्रोन एक सुरक्षात्मक गोल पिंजरे में बंद होता है और इनडोर टीम गेम “ड्रोन सॉकर” में इस्तेमाल किया जाता है। इस खेल में 3-5 खिलाड़ियों की टीम ड्रोन को हवा में लटके हूप से गुजारकर अंक हासिल करती है।
हेलसेल की वेबसाइट के अनुसार, ड्रोन सॉकर की अवधारणा 2015 में पेश की गई थी और 2017 में दक्षिण कोरिया में इसे औपचारिक रूप से लॉन्च किया गया। इसे वर्ल्ड एयर स्पोर्ट्स फेडरेशन से मान्यता भी मिली है।
कांग्रेस ने साधा निशाना
इस विवाद पर कांग्रेस ने भी प्रतिक्रिया दी है। पार्टी के यूथ विंग ने सोशल मीडिया पर तंज कसते हुए आरोप लगाया कि पहले चीन और अब कोरिया से जुड़े उत्पादों को “इन-हाउस इनोवेशन” बताने का दावा किया जा रहा है। ट्वीट में प्रधानमंत्री Narendra Modi पर कटाक्ष करते हुए “आत्मनिर्भर” के नारे पर सवाल उठाए गए। फिलहाल, सॉकर ड्रोन को लेकर उठे सवालों के बीच विश्वविद्यालय पर जांच और जवाबदेही का दबाव बढ़ता दिख रहा है।