1. बड़े भुगतान की अनिवार्य रिपोर्टिंग
प्रस्तावित नियमों के अनुसार, यदि किसी वित्त वर्ष में आपके एक या अधिक क्रेडिट कार्ड से कुल ₹10 लाख या उससे अधिक (कैश को छोड़कर) भुगतान होता है, तो बैंक या कार्ड जारीकर्ता को इसकी जानकारी आयकर विभाग को देनी होगी। वहीं, अगर ₹1 लाख या उससे ज्यादा की रकम नकद चुकाई जाती है, तो उसकी भी रिपोर्टिंग अनिवार्य होगी। इसका मकसद बड़े ट्रांजैक्शन की निगरानी और टैक्स अनुपालन को मजबूत करना है।
2. पैन आवेदन में काम आएगा कार्ड स्टेटमेंट
अब तीन महीने से कम पुराना क्रेडिट कार्ड स्टेटमेंट पते के प्रमाण के रूप में स्वीकार किया जा सकता है। इससे नए पैन कार्ड के लिए आवेदन करने वालों को दस्तावेज जुटाने में सहूलियत मिलेगी।
3. क्रेडिट कार्ड से टैक्स भुगतान की सुविधा
आयकर का ऑनलाइन भुगतान करते समय क्रेडिट कार्ड को भी वैध भुगतान माध्यम के रूप में शामिल किया जाएगा। पहले डेबिट कार्ड और नेट बैंकिंग जैसे विकल्प ही उपलब्ध थे। हालांकि, करदाताओं को यह ध्यान रखना होगा कि क्रेडिट कार्ड से भुगतान पर ब्याज या अतिरिक्त शुल्क लग सकते हैं।
4. कंपनी कार्ड पर खर्च और टैक्स
यदि किसी कर्मचारी को कंपनी की ओर से क्रेडिट कार्ड दिया जाता है और उसका बिल कंपनी चुकाती है, तो इसे परक्विजिट माना जा सकता है और इस पर टैक्स देनदारी बन सकती है। लेकिन यदि खर्च पूरी तरह आधिकारिक कार्य के लिए है और उसका उचित रिकॉर्ड मौजूद है, तो टैक्स से छूट मिल सकती है।
5. क्रेडिट कार्ड के लिए पैन जरूरी
नए नियमों के तहत किसी भी बैंक या वित्तीय संस्था से क्रेडिट कार्ड लेने के लिए पैन नंबर अनिवार्य होगा। बिना पैन के आवेदन स्वीकार नहीं किए जाएंगे। इसका उद्देश्य बड़े वित्तीय लेनदेन को टैक्स सिस्टम से जोड़ना और फर्जी खातों पर रोक लगाना है।
आपके खर्च पर क्या असर?
इन प्रस्तावित बदलावों से संकेत मिलता है कि सरकार क्रेडिट कार्ड के बड़े लेनदेन पर कड़ी निगरानी रखना चाहती है और डिजिटल भुगतान को अधिक पारदर्शी बनाना चाहती है। यदि आप उच्च मूल्य के ट्रांजैक्शन करते हैं या कंपनी द्वारा जारी कार्ड का उपयोग करते हैं, तो अपने रिकॉर्ड और टैक्स योजना को सुव्यवस्थित रखना अब और भी जरूरी हो जाएगा।