कहां से शुरू हुआ विवाद?
राजपाल यादव के वकील भास्कर उपाध्याय के मुताबिक, पूरा मामला फिल्म Ata Pata Laapata से जुड़ा है। फिल्म के लिए बिजनेसमैन माधव गोपाल अग्रवाल ने राजपाल को 5 करोड़ रुपये का लोन दिया था। अगस्त 2012 तक दोनों के बीच तीन अतिरिक्त समझौते हुए, जिनके तहत पांच चेक जारी किए गए, जिन्हें दिसंबर 2012 तक भुनाया जाना था। बताया जाता है कि फिल्म के म्यूजिक लॉन्च तक सब कुछ सामान्य था, लेकिन इसी इवेंट के बाद हालात बदल गए।
अमिताभ बच्चन से क्या जुड़ाव?
वकील के अनुसार, सितंबर 2012 में फिल्म के म्यूजिक लॉन्च इवेंट में अमिताभ बच्चन शामिल हुए थे। आरोप है कि माधव गोपाल मंच पर उनके साथ आना चाहते थे, लेकिन राजपाल यादव की टीम ने इसकी अनुमति नहीं दी। चूंकि अमिताभ बच्चन बिना किसी फीस के कार्यक्रम में पहुंचे थे, इसलिए आयोजकों ने मंच साझा करने की अनुमति नहीं दी। इसी बात से नाराज होकर माधव गोपाल ने दिल्ली हाई कोर्ट में शिकायत दाखिल कर दी और लोन वापसी के साथ फिल्म पर रोक लगाने की मांग की।
समझौते और कानूनी पेच
सितंबर से दिसंबर 2012 के बीच विवाद बढ़ता गया। इस दौरान राजपाल यादव ने 60,60,350 रुपये का चेक दिया और एक नया समझौता हुआ, जिसके बाद पुराने समझौते रद्द माने गए। हालांकि 2016 में एक नया आदेश आया, जिसमें 10 करोड़ रुपये की अदायगी का जिक्र हुआ। अदालत ने लोन चुकाने की प्रक्रिया तय योजना के अनुसार पूरी करने को कहा। बाद में राशि में बदलाव किया गया, लेकिन बाकी रकम को लेकर विवाद बना रहा। एक अन्य गारंटर आनंद दत्ताराम ने 15 करोड़ की संपत्ति जमानत में रखने और एक महीने का समय देने की पेशकश की, जिसे माधव गोपाल ने स्वीकार नहीं किया। इसके बाद राजपाल यादव को सजा दिलाने की मांग की गई।
पुराने चेक फिर बने मुद्दा
वकील का दावा है कि जिन पुराने चेकों को रद्द माना गया था, उन्हें बाद में फिर से आधार बनाया गया। 2018 में निचली अदालत में मामला चला और अभिनेता को दोषी ठहराते हुए 11 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया गया। नवंबर में तीन महीने की सजा भी सुनाई गई। हालांकि, राजपाल यादव की कानूनी टीम ने दो समानांतर मामलों पर आपत्ति जताई। नए जज के समक्ष पुनः सुनवाई में मामले की वैधता पर सवाल उठे। अभिनेता ने अदालत में कहा है कि उन्हें समय दिया जाए तो वे बकाया राशि चुका देंगे। फिलहाल सुनवाई जारी है और उनकी टीम योग्यता के आधार पर राहत की मांग कर रही है।