Personal Loan Tips : पर्सनल लोन कहां से लें? बैंक, NBFC या डिजिटल ऐप, जानें सही विकल्प

Personal Loan Tips : पर्सनल लोन चाहिए तो कहां से लें? बैंक, NBFC या डिजिटल ऐप- जानिए सही विकल्प चुनने का तरीका

नई दिल्ली: अचानक मेडिकल खर्च, घर की जरूरत, बच्चों की पढ़ाई या किसी अन्य जरूरी काम के लिए पैसों की जरूरत पड़ने पर पर्सनल लोन एक आसान विकल्प हो सकता है। लेकिन लोन लेने से पहले यह समझना जरूरी है कि कहां से लोन लेना आपके लिए ज्यादा फायदेमंद रहेगा—बैंक, NBFC या डिजिटल लेंडिंग प्लेटफॉर्म से।

पर्सनल लोन आमतौर पर बिना किसी संपत्ति को गिरवी रखे मिलता है, लेकिन इसकी ब्याज दर और अन्य शुल्क आवेदक की आय, क्रेडिट प्रोफाइल, लोन अवधि और लेंडर की नीतियों के आधार पर अलग-अलग हो सकते हैं। RBI के अनुसार बैंक पर्सनल लोन पर ब्याज दर तय करने के लिए अपनी निर्धारित नीतियों और लागू बेंचमार्क का इस्तेमाल करते हैं।

बैंक से पर्सनल लोन लेना कितना बेहतर?

अगर आपका सैलरी अकाउंट किसी बैंक में है और आपका क्रेडिट रिकॉर्ड अच्छा है, तो सबसे पहले उसी बैंक से पर्सनल लोन की पेशकश जांचना समझदारी हो सकती है। बैंक से लोन लेने पर प्रक्रिया अपेक्षाकृत व्यवस्थित होती है और कई ग्राहकों को प्री-अप्रूव्ड ऑफर भी मिल सकते हैं।

हालांकि सिर्फ इसलिए लोन न लें कि बैंक ने आपको ऑफर दिया है। ब्याज दर के साथ प्रोसेसिंग फीस, GST, प्रीपेमेंट/फोरक्लोजर से जुड़े शुल्क और कुल भुगतान जरूर देखें।
NBFC से लोन कब ले सकते हैं?

NBFC भी पर्सनल लोन का विकल्प है। कुछ मामलों में NBFC की पात्रता शर्तें बैंक से अलग हो सकती हैं और आवेदन की प्रक्रिया सुविधाजनक हो सकती है। लेकिन यहां भी अलग-अलग कंपनियों की ब्याज दर और शुल्क की तुलना करना जरूरी है।

RBI के अनुसार NBFC अपने बोर्ड-अनुमोदित ब्याज दर मॉडल के आधार पर ग्राहकों से ब्याज वसूलते हैं।

डिजिटल लोन ऐप से सावधान

मोबाइल ऐप के जरिए कुछ ही समय में लोन मिलने का दावा आकर्षक लग सकता है, लेकिन जल्दबाजी में किसी भी ऐप से लोन लेना जोखिम भरा हो सकता है। आवेदन करने से पहले यह जांचें कि लोन देने वाली संस्था RBI के दायरे में आने वाली विनियमित इकाई है या किसी ऐसी विनियमित संस्था के साथ उसका संबंध है जिसे लोन देने की अनुमति है।

लोन की वास्तविक लागत समझे बिना केवल “कम EMI” या “तुरंत लोन” जैसे विज्ञापनों के आधार पर फैसला नहीं करना चाहिए।

पर्सनल लोन लेने से पहले इन 6 बातों की तुलना करें

  1. ब्याज दर: अलग-अलग लेंडर से मिलने वाले ऑफर की तुलना करें।
  2. कुल लागत: सिर्फ EMI नहीं, बल्कि पूरे कार्यकाल में कितना पैसा चुकाना है, यह देखें।
  3. प्रोसेसिंग फीस: कम ब्याज दर वाला लोन भी अधिक शुल्क के कारण महंगा पड़ सकता है।
  4. लोन अवधि: लंबी अवधि से EMI कम हो सकती है, लेकिन कुल ब्याज ज्यादा चुकाना पड़ सकता है।
  5. प्रीपेमेंट नियम: भविष्य में लोन जल्दी चुकाने की योजना है तो संबंधित शुल्क और शर्तें पहले समझें।
  6. EMI की क्षमता: ऐसी EMI चुनें जिसे आपकी मासिक आय आसानी से संभाल सके।

अगर लोन फ्लोटिंग ब्याज दर वाला है, तो ब्याज दर बदलने की स्थिति में EMI या लोन की अवधि पर पड़ने वाले असर को समझना भी जरूरी है। RBI की FAQ के मुताबिक EMI आधारित फ्लोटिंग-रेट पर्सनल लोन में ब्याज दर रीसेट होने के प्रभाव की जानकारी उधारकर्ता को दी जानी चाहिए।

आखिर कहां से लें पर्सनल लोन?

आम तौर पर पहली प्राथमिकता बैंक हो सकती है, खासकर जब वहां से आपको प्रतिस्पर्धी ब्याज दर और स्पष्ट शर्तों वाला ऑफर मिल रहा हो। अगर बैंक का ऑफर उपयुक्त नहीं है तो RBI-विनियमित NBFC के विकल्पों की तुलना की जा सकती है।

डिजिटल प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करते समय लेंडर की विश्वसनीयता, लोन की कुल लागत और सभी नियम-शर्तों की जांच करना बेहद जरूरी है।

पर्सनल लोन में सबसे सस्ता विकल्प हमेशा वह नहीं होता जिसकी EMI सबसे कम दिखाई दे। सही फैसला लेने के लिए ब्याज दर, फीस, अवधि और कुल भुगतान चारों की तुलना करें। अपनी जरूरत और repayment capacity के हिसाब से ही लोन लें।

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