March 25, 2019
शिक्षा

इलाहाबाद यूनिवर्सिटी को पूरब का ’आक्सफोर्ड’ बनाने वाले कुलपति रतनलाल हांगलू

प्रयागराज: किसी देश का भविष्य उस देश की शिक्षा पर निर्भर करता है और शिक्षा के लिए शिक्षण संस्थानों का मजबूत होना बेहद जरुरी है. भारत की शिक्षा व्यवस्था से कौन नहीं परिचित है. जहाँ निजी स्वार्थों के चलते शिक्षा ही नहीं बल्कि देश का भविष्य भी खतरे में डाला जाता रहा है. लेकिन उस सबके बाद भी पूरब के ऑक्सफ़ोर्ड के नाम से पहचान बनाने वाले इलाहाबाद यूनिवर्सिटी ने विषम परिस्थितियों में भी बड़ा कीर्तमान स्थापित किया है.

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शिक्षा सिर्फ डिग्रियां हासिल करने के लिए ही नहीं होती है. इससे किसी देश की व्यवस्था, विकास और देश की स्थित भी तय होती है. अगर सही मायने में कहा जाए तो शिक्षित युवा ही देश का विकास तय करते हैं. ऐसे में शिक्षण संस्थाओं को मजबूत और बेहतर बनाना बेहद ही जरुरी है. आज हम बात कर रहे हैं. इलाहाबाद यूनिवर्सिटी की. यानी कि पूरब के ऑक्सफ़ोर्ड की… जी आपने सही सुना… पूरब के ऑक्सफ़ोर्ड की. इलाहाबाद यूनिवर्सिटी पूरब का ऑक्सफ़ोर्ड क्यों कहा जाता है यह आपको आगे पता चला जाएगा. लेकिन इलाहाबाद यूनिवर्सिटी का नाम आते ही आपके दिमाग में कई बातें घूम गयी होंगी. भारत के नामचीन यूनिवर्सिटीज में इलाहाबाद यूनिवर्सिटी का नाम आता है.

अपनी व्यवस्थाओं को लेकर इलाहाबाद यूनिवर्सिटी का भारत ही नहीं विश्व में भी नाम है. इलाहाबाद यूनिवर्सिटी ने गंगा, यमुना एवं अदृश्य सरस्वती के संगम पर स्थापित महर्षि भारद्वाज की गुरूकुल परम्परा का निर्वहन करते हुए लगभग सभी क्षेत्रों में वह कीर्तिमान स्थापित किया है जैसा भारत के अन्य यूनिवर्सिटीज ने नहीं किया होगा. इलाहाबाद यूनिवर्सिटी भारत सबसे पुरानी यूनिवर्सिटीज में से एक है ही, यूनिवर्सिटी ने विज्ञान, साहित्य राजनीति, प्रशासनिक सेवा आदि क्षेत्रों में अभूतपूर्व योगदान दिया. यूनिवर्सिटी को इस कामयाबी की ओर ले जाने में इलाहाबाद यूनिवर्सिटी के कुलपति का बड़ा योगदान रहा है. एक समय था जब इलाहाबाद यूनिवर्सिटी भी गर्दिश में था. सन् 2005 में इस संस्था को केन्द्रीय स्वरूप मिला लेकिन यूनिवर्सिटी पर मठाधीशों एवं षड्यंत्रकारियों का कब्जा था. उस दौर में इलाहाबाद यूनिवर्सिटी को शिक्षण के साथ साथ अन्य अवैध गतिविधियों के लिए भी प्रयोग में लाया जाने लगा था.

जिससे इलाहाबाद यूनिवर्सिटी की छवि को लगातार नुकसान हो रहा था और वह क्रम लम्बे समय तक चलता रहा. ऐसे में जब 2016 में प्रो आरएल हांगलू को इलाहाबाद यूनिवर्सिटी का कुलपति बनाकर भेजा गया तो कई बड़ी चुनौतियां सामने खड़ी थी. जिसमें इलाहाबाद यूनिवर्सिटी को पुनः वही पहचान दिलाना, षड्यंत्रकारी शक्तियों को यूनिवर्सिटी से बाहर करना. यह बड़ा चुनौतियों से भरा हुआ काम था जोकि लम्बे समय से इलाहाबाद यूनिवर्सिटी को एक अखाड़ा बनाकर रखे थे. हांगलू ने कुलपति का कार्यभार ग्रहण करने के बाद इलाहाबाद यूनिवर्सिटी को फिर वही पुरानी पहचान दिलाने की ठानी और सभी गैर शिक्षण से जुड़ी गतिविधियों को यूनिवर्सिटी से बाहर का रास्ता दिखाना शुरू कर दिया.

इस दौरान प्रोफेसर हांगलू ने पहले से पड़े कई अपूर्ण निर्माण कार्यो को पूर्णता प्रदान की तथा कई पुराने भवनों जैसे दरभंगा हाल एवं छात्रावासों के नवीनीकरण के साथ साथ प्रशासनिक भवनों का निर्माण कार्य दीन दयाल उपाध्याय ई लर्निग सेन्टर, तिलक हाल का निर्माण, विवेकानन्द भवन का निर्माण, उच्च स्तरीय सुविधा युक्त सीबीसीएस भवन. महाविद्यालयों की स्थिति केवल ’प्रवेश’ एवं ’परीक्षा’ तक ही सीमित हो गयी थी. महाविद्यालय केवल ‘डिग्री’ प्राप्त करने का केन्द्र बन चुके थे. शिक्षकों की संख्या लगभग समाप्त हो गयी थी. ऐसी स्थिति में वर्तमान कुलपति ने महाविद्यालयों में शिक्षकों की नियुक्ति कार्य एक चुनौतीपूर्ण ढंग से लेकर किया, परिणामतः 2 ही सत्र में कालेजों में पठन-पाठन सुचारू रूप से चलने लगा, छात्रों और अभिभावको में खुशी की लहर दौड़ पड़ी. प्रो0 हांगलू यही नहीं रूके, उन्होंने भगीरथ प्रयास करके कालेजों में ’स्नातकोत्तर’ एवं ’रिसर्च’ का कोर्स का भी सफल क्रियान्वयन किया.

विषम परिस्थितियों के बाद भी प्रो हांगलू ने महाविद्यालयों एवं कालेजों में अनुशासित शैक्षणिक वातावरण प्रदान किया है, यूनिवर्सिटी में ऐसे शिक्षकों पर भी कार्यवाही सुनिश्चित की जो अध्ययन एवं अध्यापन को प्रति जिम्मेदार नहीं थे. निःसंदेह वर्तमान कुलपति का प्रयास है कि उक्त समस्याओं से परिसर मुक्त हो. प्रो हांगलू की कार्यशैली कुछ मठाधीशों को उनके कार्यभार ग्रहण करने से ही अप्रिय लग रही है. लेकिन अपने सुलझे हुए व्यक्तित्व और कर्तव्यों के प्रति जिम्मेदार होने के नाते यूनिवर्सिटी को नई दिशा दे दी.

उनके इन्हीं प्रयासों के कारण पूरबी उत्तर प्रदेश के लगभग एक दर्जन सांसदों ने वर्तमान कुलपति के पक्ष में उनके द्वारा किए गए सार्थक कार्यों से सरकार को अवगत कराने के साथ ही साथ उक्त कार्यों हेतु उत्साहवर्धन भी किया है. कुलपति हांगलू के नेतृत्व में इलाहाबाद यूनिवर्सिटी ने अंतरराष्ट्रीय स्थर पर भी काफी ख्याति प्राप्त की.

इस बारे में पूर्व विभागाध्यक्ष वनस्पति विज्ञान विभाग के प्रोफेसर अनुपम दीक्षित ने बताया कि, वर्तमान कुलपति प्रोफेसर हांगलू विगत कुछ वर्षों से गर्त में जा रहे इलाहाबाद यूनिवर्सिटी को अपने अथक प्रयासों से दिनों-दिन नई ऊंचाइयां प्रदान कर रहे हैं लेकिन इस विकास पुरुष के पीछे निरंतर कुछ षड्यंत्रकारी शक्तियां उन्हें और इलाहाबाद यूनिवर्सिटी को कमजोर एवं धूमिल करने के लिए लगी हुई हैं पर इस स्थिति में पूरी यूनिवर्सिटी फैमिली एवं प्रयागराज के स्थानीय नागरिक विकास पुरुष प्रोफेसर हांगलू के साथ कदम से कदम मिलाकर खड़े हैं.

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