Wednesday, July 28, 2021

‘संजीवनी बूटी’ नहीं है रेमडेसिविर: जानिये AIMS चीफ गुलेरिया ने क्या कहा..

राष्ट्रीय

देश में कोरोना वायरस की दूसरी लहर अपने चरम पर है. हर रोज लाखों की संख्या में नये मामले सामने आ रहे हैं, जबकि इन बढ़ते मामलों के बीच देश की स्वास्थ्य सेवाएँ भी बेहाल हो चुकी हैं. जगह जगह ऑक्सीजन की कमी और बुरे प्रबंधन के कारण लोगों की जान जा रही है. इसी बीच देश में रेमडेसिविर और ऑक्सीजन की कालाबाजारी भी शुरू हो गयी है. लोग बढ़े हुए दामों पर खरीदने को मजबूर हो रहे है. डर के माहौल के बीच AIMS दिल्ली के डायरेक्टर शीर्ष डॉक्टर रणदीप गुलेरिया ने रेमडेसिविर को लेकर बड़ी चौंकाने वाली जानकारी दी है.

जिसमें उन्होंने बताया है कि रेमडेसिविर कोई ‘संजीवनी’ नहीं है. जोकि लोग इसको खरीदने के लिए बेचैन हो रहे हैं. डॉक्टर कोरोना वायरस के मरीज को किस स्थिति में रेमडेसिविर देता है यह जानना जरूरी है. उन्होंने कहा कि 85 प्रतिशत रोगी बिना रेमडेसिविर के ठीक हो जाएंगे.

गुलेरिया ने कहा, कोरोना वायरस आने वाले केसों में मरिजोएँ को खांसी-जुकाम, गले में खराश आदि जैसे सामान्य लक्षण होंगे और पांच से सात दिन में वे इन लक्षणों के इलाज के जरिये उबर जाएंगे. सिर्फ 15 प्रतिशत रोगियों को ही दूसरे चरण का समाना करना पड़ सकता है.

ऑक्सीजन की मारा-मारी पर गुलेरिया का मत

रेमडेसिविर के साथ ही ऑक्सीजन की कमी भी देश में बड़ी समस्या बनकर उभरी है. कई राज्यों में ऑक्सीजन की कमी के चलते मरीजों ने दम तोड़ दिया. दावा किया जा रहा है कि कई अस्पतालों में मरीजों के परिजनों से ही ऑक्सीजन लाने की मांग कर दी. ऐसे में ऑक्सीजन को लेकर लूट मार वाली स्थिति बन चुकी है. लेकिन इसपर रणदीप गुलेरिया ने कुछ और ही कहा है.

उनके अनुसार केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के एक बयान के अनुसार स्वस्थ लोग, जिनका ऑक्सीजन सेच्युरेशन 93-94 प्रतिशत है, उन्हें अपने सेच्युरेसन को 98-99 प्रतिशत तक बरकरार रखने के लिये उच्च प्रवाह ऑक्सीजन लेने की कोई जरूरत नहीं है. 94 प्रतिशत से कम ऑक्सीजन सेच्युरेशन वाले लोगों की निगरानी करने की आवश्यकता है. गुलेरिया ने कहा ऑक्सीजन एक इलाज है.

यह एक दवा की तरह है. रुक-रुककर इसके इस्तेमाल का फायदा नहीं हैं. ऐसा कोई डाटा नहीं है, जो दर्शाता हो कि यह कोविड-19 रोगियों के लिये किसी भी तरह मददगार है या होगी, लिहाजा यह बेकार की सलाह है. लेकिन समस्या यह है कि लोग इसबात को समझ नहीं पा रहे है.

अस्पताल जाने के साथ ही ऑक्सीजन को लेकर जंग जैसी स्थिति बन जा है. मेदांता अस्पताल के अध्यक्ष डॉक्टर नरेश त्रेहन ने कहा कि, अगर ऑक्सीजन का सही इस्तेमाल हो तो देश में ऑक्सीजन की कमी नहीं है. उन्होंने लोगों से कहा कि, ‘ऑक्सीजन को सुरक्षा कवच के रूप में इस्तेमाल न करें, ऐसे अन्य जरूरत मंद इससे वंचित रह सकते हैं. महत्वपूर्ण अपडेट्स के लिए JOURNALIST INDIA के साथ जुड़े रहिये.

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