देर रात तक जागना और नींद पूरी न करना आपकी सेहत पर भारी पड़ सकता है।
कम नींद से अगले दिन थकान, सुस्ती और चिड़चिड़ापन महसूस हो सकता है।
नींद की कमी से फोकस, याददाश्त और निर्णय लेने की क्षमता प्रभावित हो सकती है।
लगातार कम नींद लेने का संबंध वजन बढ़ने और मोटापे के बढ़े जोखिम से पाया गया है।
नींद पूरी न होने से शरीर के ग्लूकोज और इंसुलिन से जुड़े सिस्टम पर असर पड़ सकता है।
लंबे समय तक अपर्याप्त नींद हाई ब्लड प्रेशर और हृदय संबंधी जोखिमों से जुड़ी है।
लगातार नींद की समस्या से तनाव, चिड़चिड़ापन और मूड में बदलाव बढ़ सकते हैं।
हर दिन अलग-अलग समय पर सोने-जागने से शरीर की प्राकृतिक स्लीप साइकल प्रभावित हो सकती है।
अधिकांश वयस्कों को नियमित रूप से कम से कम 7 घंटे की नींद लेने की सलाह दी जाती है।
सोने से पहले मोबाइल और स्क्रीन का इस्तेमाल कम करें, रोज लगभग एक ही समय पर सोएं और उठें।
सोने से पहले मोबाइल और स्क्रीन का इस्तेमाल कम करें, रोज लगभग एक ही समय पर सोएं और उठें।
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