April 27, 2018
Else Uttar Pradesh

अक्ल घास नहीं ‘ताज महल’ चरने गयी थी: भरोसा न हो तो देख लो?  

आगरा: ताज महल मेरा है और इसे मेरे नाम कर दिया है. जैसा कि अभी तक मुस्लिम समुदाय के लोग करते आये हैं. जहाँ देखी सरकारी जमीन वहीँ तम्बू गाड़ लिया हद तो तब हो गयी जब उत्तर प्रदेश के वक्फ बोर्ड ने ताजमहल पर भी दावा ठोक कर उसे अपनी जागीर घोषित कर दिया.

वैसे ताज महल पर पूरे भारत का अधिकार है, बच्चे से लेकर बुजुर्ग तक और महिला से लेकर पुरुष तक हर कोई कह सकता है उसके देश में विश्व का सातवाँ अजूबा खड़ा है. लेकिन उत्तर प्रदेश वक्फ बोर्ड को ये बात हजम न हो रही. कहीं इतिहास में पढ़ा था कि बेगम की याद में शाहजहाँ ने ताज महल बनवाया था. शाहजहाँ अपनी बिरादरी का था तो इस लिहाज से ताज महल अपनी जागीर हुआ.

वहीँ वक्फ बोर्ड के दावे पर देश की सबसे बड़ी अदालत ने ही अब बोर्ड को उलटा लटका दिया है. दरअसल एससी ने बोर्ड से ताज महल के कागजों पर शाहजहाँ के हस्ताक्षर लाने को कह दिया है. जिसमें इस बात का जिक्र हो कि ताज महल वक्फ बोर्ड का है. अब देखना यह होगा कि वक्फ बोर्ड वाले शाहजहां को कहाँ से खोज कर दस्तखत करवा कर लाते हैं. वहीँ कोर्ट ने यह भी साफ़ कह दिया है कि बिना शाहजहाँ के दस्तखत के कोर्ट के आस-पास भी मत दिख जाना? वरना कोर्ट का समय खराब करने का केस और दर्ज हो जाएगा?

वैसे मैंने सुना था कि लोगों की अक्ल घास चरने जाती है लेकिन सत्य तो यह है कि कुछ लोगों की अक्ल ताज महल भी चरने चली जाती है. लोग अंडा की बन्दूक ही चला के देखते है कि शायद निशाना सही जगह लगे और रातों रात ताज महल के मालिक बन जाए. वैसे जानकारी के लिए बता दें कि ताज महल सहित देश की सभी पर्यटन स्थलों को आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (ASI) अपनी देखरेख में रखता हैं.

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