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वाराणसी: हादसों के बाद भी नहीं लेते हैं सबक?

वाराणसी: वाराणसी कैंट क्षेत्र में निर्माणधीन पुल के ढहने के बड़ा अभी तक 15 लोगों के शव निकाले जा चुके हैं. वहीँ कई घायलों की हालात गंभीर बनी हुई जिससे मरने वालों की संख्या बढ़ सकती है. पीएम नरेंद्र मोदी का संसदीय क्षेत्र होने के नाते योगी आदित्यनाथ ने सख्ती दिखाई और लापरवाही के लिए कई अधिकारियों को नाप दिया है.

हादसे के बाद से लगातार सवाल उठ रहा था कि क्या हम हादसों के बाद भी सबक नहीं ले पाते हैं. निर्माणाधीन पुल का ढहना कोई पहला या अनोखा मामला नहीं था जोकि सबकुछ नया हुआ हो, लेकिन लापरवाही की हद तो देखिये जिस पुल का निर्माण कार्य चल रहा था उसकी डिजाइन को लेकर पहले से ही सवाल उठा चुका था. उसके बाद भी लगातार लोगों की सुरक्षा की अनदेखी कर लोगों की जान को मुसीबत में डाला गया है. जब पुल का निर्माणकार्य चल ही रहा था तो उसके नीचे से ट्रैफिक के लिए कैसे खोला गया, ऐसे भी अनगिनत सवाल है जो इसे हादसा नहीं बल्कि सोची समझी हत्या करार देने के लिए काफी है.

हालाँकि राज्य सर्कार ने थोड़ी तेजी दिखाते हुए तुरंत एक्शन लिया और चार अधिकारियों को निलम्बित कर दिया. वहीँ पीड़ितों को पांच पांच लाख का मुआवजा भी दे दिया. बताया जा रहा अहि कि 129 करोड़ की लागत में बनने वाला यह पुल, जिसका एक हिस्सा मंगलवार शाम को गिरा था उसका निर्माण महज तीन माह पहले ही किया गया था. मतलब यह है कि मात्र तीन माह में ही पुल धरासाई हो गया. तो क्या इसे बड़ा लापरवाही नहीं कहा जाए. हालाँकि जांच रिपोर्ट्स में क्या कहा जाता है यह देखना होगा,  हो सकता है कि जाँच रिपोट्स में मरने वालों को ही दोषी माना जाए…..?

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