January 21, 2019
दिल्ली

SC पहुंचा मामला: जितनी जल्दी में पास हुआ आर्थिक आधार पर आरक्षण, उतनी ही जल्दी लग सकती है रोक!

नई दिल्ली: केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार द्वारा सवर्ण समाज के गरीब तबके को आर्थिक आधार पर आरक्षण देने के लिए किये गये संविधान संशोधन को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गयी है. जिसके बाद यह मामला पर कोर्ट में पहुँच चुका है.

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बतादें कि जिस गति से आर्थिक आधार पर आरक्षण को लेकर लोकसभा और राज्यसभा में इसे पास किया गया है उसी गति से इसे रद्द या इस पर रोक लगाई जा सकती है! दरअसल सामान्य वर्ग में आर्थिक रूप से पिछड़े तबके के लिये नौकरियों और शिक्षा में दस फीसदी आरक्षण की व्यवस्था करने वाले संविधान संशोधन विधेयक को बृहस्पतिवार को उच्चतम न्यायालय में चुनौती दी गयी. गैर सरकारी संगठन यूथ फॉर इक्वेलिटी ने याचिका में इस विधेयक को निरस्त करने का अनुरोध करते हुये कहा है कि एकमात्र आर्थिक आधार पर आरक्षण नहीं दिया जा सकता.

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याचिका में कहा गया है कि इस विधेयक से संविधान के बुनियादी ढांचे का उल्लंघन होता है क्योंकि सिर्फ सामान्य वर्ग तक ही आर्थिक आधार पर आरक्षण सीमित नहीं किया जा सकता है और 50 फीसदी आरक्षण की सीमा लांघी नहीं जा सकती. साथ ही इसे गैरसंवैधानिक भी करार दिया गया है. आपको जानकारी के लिए यहाँ बता दें कि केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने सोमवार को अचानक सवर्ण समाज के लिए आर्थिक आधार पर 10 प्रतिशत आरक्षण देने के कैबिनेट के फैसले को मंजूरी दी, जिसके बाद इसे लोकसभा में पेश किया गया और पास भी हो गया.

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इतना ही नहीं बुधवार को राज्य सभा ने 124वें संविधान संशोधन विधेयक को सात के मुकाबले 165 मतों से पारित कर दिया था. अब इसे राष्ट्रपति के पास हस्ताक्षर के लिए भेजा जाएगा. जिसके बाद यह कानून बन जायेगा. लेकिन कानून बने इससे पहले इस संविधान संशोधन को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दे दी गयी है. अब देखना यह है कि सुप्रीम कोर्ट इस मामले को लेकर दाखिल की गयी याचिका को स्वीकार कर कब सुनवाई करता है.

वेबवार्ता न्यूज़ एजेंसी

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