November 15, 2018
Desh

एससी-एसटी एक्ट एवं जातिगत आरक्षण देश के साथ बहुत बड़ा धोखा

नयी दिल्ली: आज पूरा देश एससी-एसटी एक्ट एवं जातिगत आरक्षण के खिलाफ खड़ा हो गया है. प्रत्येक दिन आंदोलन, झड़प, सांसदों, नेताओं का घेराव आम बात हो गयी है. ऐसे मानो देश में लॉ& आर्डर बिल्कुल चरमरा सी गई है, देश की 80% जनता सरकार के फैसले के खिलाफ सडक पर उतर चुकी है.

दरअसल गुरुवार को पहले से प्रस्तावित ‘भारत बंद’ सफल रहा है. बिहार, मध्यप्रदेश, राजस्थान जैसी राज्यों में सिका काफी प्रभाव देखा गया. वहीँ इसी आन्दोलन की आड़ में कुछ लोगों इ अब फिर से समाज को गुमराह करना शुरू कर दिया है. आन्दोलन की आड़ में ऐसे ऐसे लोग नेता बनने की कोशिश कर रहे हैं जो आज तक धरातल पर कहीं नजर नहीं आए, कहीं इस एक्ट एवं आरक्षण का विरोध नहीं किया परन्तु आज इस आंदोलन की आड़ में अपनी रोटी सेंकने की पूरा जोर लगा बैठे हैं.

Rana Thakur

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ज्ञात हो कि जातिगत आरक्षण विरोधी आंदोलन पिछले 10 सालों से जंतर मंतर एवं देश के अन्य शहरों में राना ठाकुर जी के नेतृत्व में लगातार किया जा रहा है जिसका परिणाम है कि देश की जनता में जागरुकता आई है, और आरक्षण विरोधी आंदोलन अब देश के कोने कोने से उठने लगी है, परन्तु कुछ नेता बनने की होड़ में आंदोलन को भटकाने की कोशिश कर रहै हैं.

Rana Thakur

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सरकार द्वारा उच्चतम न्यायालय के आदेश के खिलाफ एससी-एसटी एक्ट पुरी सख्ती से लाने के बाद आजाद मंच एवं अन्य आरक्षण विरोधी साथी ने आजाद मंच के संरक्षक राना ठाकुर के नेतृत्व में दिल्ली में सांसदों को घेरना शुरु किया जिसका परिणाम आज आपको देखने को मिल सकता है जगह जगह देश में सांसदों का घेराव का दौर चल रहा है परन्तु मीडिया उन्हीं को दिखाने का काम कर रही है जिसने धरातल पर कभी कोई काम किया ही नहीं और आज आंदोलन की आड़ में नेता बनने की कोशिश कर रहे हैं ,कहीं आंदोलन को खत्म करने की साजिश तो नहीं हैं

एससी-एसटी एक्ट अध्यादेश के खिलाफ सर्वप्रथम राना ठाकुर जी के नेतृत्व में आजाद मंच ने सांसदों को ज्ञापन देने का कार्य किया, आज पुरे देश में आरक्षण विरोधी मित्र सासंदों को ज्ञापन दे रहें है परन्तु मीडिया यहां भी चुप बैठी है जो अपने आप में बहुत बड़ा सवाल उठता है! अगस्त महीने में जयपुर में राज्य भवन का घेराव सर्वप्रथम इनलोगों ने ही किया जिसका परिणाम राना ठाकुर, सुरेन्द्र मालखेड़ी एवं राजकमल जी को राजस्थान से 6 महीने के तड़ीपार कर दिया गया. मीडिया में कोई चर्चा नहीं क्योंकि मीडिया भी नहीं चाहती कि यह आंदोलन सफल हो, मीडिया तो सिर्फ उनके पीछे है जो राजनीति कर इस आंदोलन को समाप्त करना चाहती है.

Rana Thakur

पिछले कई सालों से आजाद मंच के राष्ट्रीय संयोजक आनन्द मोहन मिश्रा लगातार विधानसभा एवं अब लोकसभा चुनाव में नोटा के समर्थन के लिए पुरे देश से निवेदन करते आ रहे हैं एवं 2019 लोकसभा चुनाव के लिए आजाद मंच के संरक्षक राना ठाकुर के आह्वान पर नोटा का देशब्यापी प्रचार किया जा रहा है परन्तु आज आलम यह है कि नेता बनने की होड़ में या यूं कहे कि आंदोलन को समाप्त करने हेतु लोग कुछ टीवी चैनलों पर आकर इसका पुरा श्रेय खुद लेने के फिराक में बैठे है, परन्तु उन नेताओं को यह अभी ज्ञात नहीं है कि राना ठाकुर के नेतृत्व में सिर्फ आजाद मंच ही नहीं कई बड़े संगठन लगभग 17 राज्यों में अपनी पैठ बना चुकी है जिसका परिणाम आपको जल्द ही देखने को मिलेगा. आज ‘भारत बंद’ तो एक ट्रेलर है, राना ठाकुर के नेतृत्व में लाखों कार्यकर्ता एक बड़े आंदोलन की तैयारी में है. दरअसल भारत बंद की आड़ में जो लोग सामने आ रहे हैं उनकी राजनीतिक महत्वाकांक्षा है. वह किसी न किसी दल या विचारधारा से ओतप्रोत हैं. वह सिर्फ अपने आकाओं के इशारे पर नाच रहे हैं. जिनका वास्तविक टूर पर एससी एसटी एक्ट और आरक्षण विरोध से कोई मतलब ही नहीं है!

आनंदमोहन जी 

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