November 15, 2018
Badi khabren Desh

20 वर्षों में सबसे ज्यादा बेरोजगारी दर: रोजगार सृजन में फेल हुई सरकार!

नई दिल्ली: केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार पर देश में रोजगार सृजन को लेकर सवाल उठ रहा है. सरकार के कागजी और प्रवक्ताओं के दावों से हटकर एक रिपोर्ट सामने आई है. जिसने भारत सरकार के रोजगार सृजन को लेकर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है.

बतादें कि एक रिपोर्ट के मुताबिक देश में बेरोजगारी दर 20 वर्षों में सबसे अधिक हो गई है. पिछले चार सालों में भारत के किसी भी सेक्टर में रोजगार का सही से सृजन नहीं हो सका. सामने आई रिपोर्ट में बताया गया है कि युवाओं में बेरोजगारी की दर 16 फीसद तक पहुंच गई है. इसके पीछे दो कारण सामने आये हैं. पहली, नौकरियों (Jobs) के सृजन की रफ्तार धीमी है और दूसरी, इंडस्ट्री में कार्यबल (मैन पावर) में कटौती.

अजीम प्रेमजी विश्वविद्यालय के सतत रोजगार केंद्र द्वारा रोजगार सृजन को लेकर पेश की गयी रक रिपोर्ट में इन बातों का खुलासा हुआ है. अजीम प्रेमजी विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ लिबरल स्टडीज ने देश में बढ़ती बेरोजगारी को लेकर के रिपोर्ट तैयार की है. ‘स्टेट ऑफ वर्किंग इंडिया- 2018’ नाम की इस  रिपोर्ट में श्रम ब्यूरो के पांचवीं वार्षिक रोजगार-बेरोजगारी सर्वेक्षण (2015-2016) आंकड़े पेश किये गये हैं.

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श्रम मंत्रालय की रिपोर्ट के मुताबिक, कई सालों तक बेरोजगारी दर दो से तीन प्रतिशत के आसपास रहने के बाद साल 2015 में पांच प्रतिशत पर पहुंच गई. साथ ही युवाओं में बेरोजगारी की दर 16 प्रतिशत तक पहुंच गई है. जोकि 20 वर्षों से सबसे ज्यादा मानी जा रही है. रिपोर्ट में बताया गया है कि सकल घरेलू उत्पाद यानी की (जीडीपी) में वृद्धि के परिणामस्वरूप रोजगार में वृद्धि नहीं हुई है. अध्ययन के अनुसार जीडीपी में 10 फीसदी की वृद्धि के परिणामस्वरूप रोजगार में एक प्रतिशत से भी कम की वृद्धि हुई है. मतलब सरकार की बताई गयी जीडीपी के बाद भी रोजगार में वृधि नहीं हुई है. इस रिपोर्ट में बढ़ती बेरोजगारी को भारत के लिए नई समस्या बताया गया है.

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वहीँ अजीब बात यह है कि जिस साल में बेरोजगारी दर में वर्धि हुई है उस साल का सरकार समग्र रोजगार की स्थिति पर कोई डेटा भी जारी नहीं कर रही है. सेंटर फॉर मॉनीटरिंग द इंडियन इकोनॉमी (सीएमआईई) जैसे निजी स्रोतों के उपलब्ध डेटा से पता चलता है कि नौकरियों का सृजन कमजोर ही बना रहेगा. साथ ही रिपोर्ट में सबसे चौंकाने वाली बात यह भी है कि भारत में अंडर एंप्लॉयमेंट और कम मजदूरी भी समस्या है तो दूसरी ओर, उच्च शिक्षा प्राप्त और युवाओं में बेरोजगारी की दर 16 प्रतिशत तक पहुंच गई है.

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