October 23, 2018
Sameeksha

चलो चुल्लूभर पानी में डूब मरते हैं….!

बैंगलोर में इलाज करवाने वाले और रवांडा और युगांडा का विकास करने का ठेका लेने वालों को अपनी दिल्ली का हाल देखकर चुल्लू भर पानी में डूब जाना चाहिए. साथ ही लेकिन उससे पहले इस सिस्टम को भी आग लगा देनी होगी. क्योंकि इसके लिए हम सब जिम्मेदार हैं.

देश की राजधानी यानी कि दिल्ली, जहाँ केंद्र से लेकर राज्य सरकार तक, पीएम से लेकर सीएम तक, हाईकोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक, सैकड़ों स्वघोषित संगठन से लेकर भूख प्यास पर नजर रखने वाला आयोग तक. यह बस उँगलियों पर गिनने वाले नाम है. वरना राजधानी दिल्ली की जितनी आवादी होगी उससे तो कहीं ज्यादा मंत्रालय, विभाग, संस्थान फलाना-ठिमका होगा. लेकिन इस सब के बाद भी पीएम से लेकर सीएम तक के मुंह पर कालिख पोतने वाली घटना ने दिल्ली को झकझोर दिया है. वैसे यह घटना को कोई पहली या आखिरी नहीं है. दिल्ली में तो हर रोज लोग भूख से, घुटन से मरते हैं, पर पोस्टमार्टम सभी का नहीं होने दिया जाता है. हालाँकि इसबार बीच बच्चियों की एकसाथ मौत का पोस्टमार्टम हो गया और पहली रिपोर्ट भी सामने आ गयी है. देश की संसद से कुछ ही दूरी पर मंडावली इलाके में एक ही परिवार की तीन सगी बहनों की मौत हो गयी है. बच्चियों की मौत की भूख और कुपोषण से हुई है.

यह हम नहीं पीएम रिपोर्ट बता रही है! मंडावली के एक घर में तीन बच्चियों की हालत खराब थी. वे पानी मांग रही थी. तो उनके पडोसी शख्स ने उन तीनों को पानी पिलाया. तभी बच्चियां उल्टी करने लगी. पड़ोसी ने तुरंत उन्हें अस्पताल पहुंचाया लेकिन तब तक उनकी मौत हो चुकी थी. गरीबी और लाचारी में पिता घर से काम खोजने के लिए निकला था और बच्चियां इस बुझदिल और जहर भरी दुनिया को छोड़कर ही निकल गयी. उनका उनका यहाँ रुकना ज्यादा जरुरी भी नहीं था क्योंकि आज बच जाती तो कल किसी भेड़िये का शिकार हो जाती. लेकिन उससे ज्यादा यह मौत कठिन और दयनीय थी.

क्योंकि तीन बच्चियों की मौत उस दिल्ली में हुई है जिसे देश की राजधानी कहा जाता है. फिर जरा दिल पर हाथ रखकर सोचिये कि राजधानी से हजारों किलोमीटर दूसर गाँव में लोगों की क्या हालत होती होगी. हालाँकि स्वघोषित विकास पुरुष इस समय रवांडा और युगांडा के विकास को विकसित देश बनाने के लिए निकले हुए हैं. रवांडा में गरीबों के लिए भारत सरकार द्वारा 200 गाय गिफ्ट की गयी हैं. तो युगांडा को भी विकास के रास्ते में जल्द लौटाने का स्वघोषित वादा किया गया है. ऐसे में पीएम मोदी से दिल्ली और देशवासियों की दरखास्त है कि जब इन देशों का समुचित विकास हो जाए तो दिल्ली की भी चिंता कर ले. क्योंकि दिल्ली भी अपनी ही है.

(यह लेखक के निजी विचार हो सकते हैं)

लेखक का नाम-पता जानकर क्या करोगे?

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