October 21, 2018
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ड्रामाटर्जी के कलाकारों ने सुप्रसिद्ध नाटक ‘महारथी’ के मंचन से जीता शिमला का दिल

जेआईडेस्क: सुप्रसिद्ध नाट्य संस्था “सार्थक” की ओर से शिमला के कालीबाड़ी में आयोजित आखिल भारतीय नाटक प्रतियोगिता के पहले दिन आठ नाटकों का मंचन किया गया. जिनमें सहारनपुर, झारखंड, दिल्ली, पंजाब, शाहजहांपुर, जमशेदपुर की टीम ने अपना प्रदर्शन किया.

संस्था के संस्थापक संजीव लखनपाल के अनुसार संस्था का मुख्य उद्देश्य कला, सेवा और समर्पण है तथा नाटकों के माध्यम से समाज में न केवल चेतना जागृत करना बल्कि समस्त भारत के रंगकर्मियों को मंच प्रदान कर एक दूसरे की प्रतिभा को देखने समझने और सीखने का अवसर है. “ साथ ही राजीव लखनपाल ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि हमारी मेहनत का नतीजा है कि एक बार फिर लोगों का ध्यान  खींचने में कामयाब हुए है,  क्योंकि आज के मोबाईल इंटरनेट के समय में अगर आप नाटक के जरिये  लोगो को अपने साथ जोड़े रखते हैं.

इस नाटक प्रतियोगिता में दिल्ली की ‘ड्रामटर्जी ग्रुप’ की महारथी टीम ने भी हिस्सा लिया. युवा निर्देशक सुनील चौहान के निर्देशन में टीम ने विभांशु वैभव द्वारा लिखे गए नाटक ‘महारथी’ का मंचन किया. महारथी की टीम में नाटक के दौरान भरपूर जोश दिखा. महारथी नाटक ने दर्शकों को असल में महाभारत की याद दिला दी. इस दौरान पूरा स्थल तालियों की आवाज से गूंज उठा. बता दें ये तीन दिन तक चलने वाला ये नाटक 23 सितंबर को खत्म हो जाएगा, इसी दिन विजेताओं को सम्मानित भी किया जाएगा.

यहां पर आपको बता दें विभांशु वैभव द्वारा लिखे गए नाटक महारथी का मंचन 200 से ज्यादा बार हो चुका है. सुनील चौहान के निर्देशन में महारथी देहरादून, बरेली, बिहार, कुरूक्षेत्र सहित नोएडा में हुए नाट्य महोत्सव में कई बार विजेता रह चुका है.  नाटक के द्वारा बताया गया है कि महाभारत का प्रमुख पात्र कर्ण एक महारथी और महादानी व्यक्तित्व का स्वामी था. महाभारत के युद्ध में वह जानता था कि उसका मित्र दुर्योधन नैतिक रूप से गलत है. इसके बावजूद उसने मित्रता धर्म का पालन करते हुए दुर्योधन का पक्ष लिया. महाभारत की जब भी बातें होती हैं तो इस दानवीर और महारथी कर्ण की चर्चा होती है, और अंग राज कर्ण के उस महान व्यक्तित्व की भी बात होती है .जिससे कारण वो समाज में अपनी छवि दानवीर के  रूप मे स्थापित की है .

नाटक की कहानी महाभारत के प्रमुख पात्र कर्ण के इर्द-गिर्द घूमती रही. नाटक में दिखाया गया कि कर्ण महाभारत के शूरवीरों में से एक था. लेकिन उसका चरित्र शायद सबसे जटिल है. कर्ण जिन्दगी भर अंतरद्वंद्व में जीता रहा. खुद को ठगा और ठुकराया हुआ महसूस करता रहा. नाटक में कहा गया कि कर्ण जिंदगी भर अपने अस्तित्व के लिए लड़ता रहा. कभी अपनी गोत्र और पहचान के लिए तो कभी खुद को महान धनुर्धर साबित करने के लिए इस सबके बीच यह बात सर्वमान्य है कि कर्ण महादानी है साथ ही वह महारथी भी है. और महाभारत के यूद्ध के समय भी उसकी वीरता की कोई सानी नहीं थी वो  युद्ध में भी इस बात का संदेश दिया कि वो एक महान योद्धा है भले ही वो युद्ध अपने दुराचारी मित्र के पक्ष से लड़ रहा है .

बता दें कर्ण का किरदार शुभम बिष्ट, दुर्योधन का किरदार सतेन्द्र यादव, श्री कृष्ण का किरदार कृष्णा दास, द्रौपदी का किरदार रश्मि सिंह, कुंती का किरदार सुनैना बिष्ट, अर्जुन का किरदार कृष्णाचार्य सोनी, भीष्म पितामह का किरदार कप्तान चौधरी, धृतराष्ट्र का किरदार महफूज आलम, सखी का किरदार अन्नू कुमारी, सुदामन का किरदार दीपांश वर्मा, दु:शासन का किरदार हैरी कश्यप, द्रूपद का किरदार सागर भट्टाराइ ने बखूबी निभाया. यही वजह थी कि दर्शक दीर्घा में बैठे लोगों ने महारथी टीम की मेहनत को सराहा. आपको बता दें इस नाटक के मंच को रंजेश माहथा, लाइटनिंग की व्यवस्था सुनील चौहान और म्यूजिक की जिम्मा सागर और देवांग प्रताप सिंह ने निभाई.

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