November 18, 2018
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करुणानिधि: पांच दशक की राजनीति में पांच बार सीएम, इंदिरा से लेकर अटल तक…   

चेन्नई: तमिलनाडु की राजनीति नहीं बल्कि दक्षिण भारत ने आज एक ऐसे कलैगनार को खो दिया है. मंगलवार को द्रविड़ मुनेत्र कड़गम के प्रमुख एम करुणानिधि का निधन हो गया है. वह पिछले कई दिनों से राजधानी चेन्नई के कावेरी अस्पताल में भर्ती थे. उनके निधन ने तमिलनाडू को बड़ी क्षति मानी जा रही है.

बतादें की तमिलनाडू के पूर्व सीएम राज्य की दशा दिशा बदलने वाले और द्रमुक अध्यक्ष एम करुणानिधि का मंगलवार शाम में 6 बजकर 10 मिनट पर राजधानी चेन्नई के कावेरी अस्‍पताल में निधन हो गया है. उनके निधन की खबर लगते ही राज्य ही नहीं देशभर में शोक की लहर फ़ैल गयी है. एम करुणानिधि भले ही तमिल की राजनीति में ही सक्रीय रहे हो लेकिन उनकी धमक राष्ट्रीय राजनीति में भी रही है. पांच बार तमिलनाडु के मुख्यमंत्री के रूप में प्रतिनिधित्व करने वाले एम् करुणानिधि लगभग पांच दशकों से भारतीय राजनीति के सक्रीय अंग रहे थे.

आप शायद ही किसी 94 वर्षीय नेता का नाम जानते हों जोकि मरते दम तक राजनीति में सक्रिय की नहीं बल्कि अपने विरोधियों को हर मौके पर पस्त भी करता रहा हो. उन्हीं में एक एम् करुणानिधि थे. जिन्होंने मरते दम तक राजनीति का साथ नहीं छोड़ा या कहें की तमिल की राजनीति उनका मरते दम तक पीछा नहीं छोड़ा. तमिल राजनीति के स्तंभ माने जाने वाले मुथूवेल करुणानिधि पांच बार (1969–71, 1971–76, 1989–91, 1996–2001 और 2006–2011) तमिलनाडु के मुख्यमंत्री रह चुके हैं.

डीएमके के मुखिया की सबसे बड़ी ताकत है अतीत में मुख्यमंत्री रहते उनका किया काम, तमिलनाडु के शहरी और कस्बाई इलाकों में मजबूत कार्यकर्ता आधार और राज्य को दिल्ली से मदद दिलवाने का बेहतरीन रिकॉर्ड रहा है. सामाजिक सुधार के लिए उनके योगदानों को हमेशा याद किया जाता रहेगा.

तिरुवरूर के तिरुकुवालाई में 3 जून 1924 को जन्मे करुणानिधि ने अपने 60 साल से अधिक के राजनीतिक जीवन में हर चुनाव में अपनी सीट जीतने का रिकॉर्ड कायम किया. वह लगातार अपनी सीट से 12 बार चुनाव जीते थे. ऐसा पहले कभी नहीं हुआ है. लेकिन मंगलवार शाम को उनके निधन ने सभी को हिला कर रख दिया है.

राज्यभर में उनके समर्थक से लेकर विरोधी तक उनकी मौत की खबर को स्वीकार नहीं कर पा रहे हैं. वहीँ यह उससे भी बड़ी विडंबना की बात यह है की कावेरी अस्पताल में शाम 6:10 पर निधन के कुछ ही घंटे बाद उन्हें कोर्ट का दरवाजा खटखटाना पड़ा है. दरअसल उनकी लोकप्रियता को देखते हुए उन्हें मरीन बीच पर दफनाने की मांग की जा रही है.

वहीँ राज्य सरकार ने कानूनी अड़चन का हवाला देते हुए वह जमीन देने से मना किया है. जिसको लेकर द्रमुक समर्थक हंगामा करने लगे हैं. वहीँ यह मामला हाईकोर्ट भी चला गया है. करुणानिधि को मरीना बीच में दफनाने की जगह देने की मांग को लेकर मद्रास हाईकोर्ट के कार्यवाहक चीफ जस्टिस हुलुवादी जी रमेश इस मामले की सुनवाई हो रही है.

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