January 21, 2019
कारोबार

RBI ने किया सचेत: फिर किसानों को नहीं मिलेगा कर्ज…

नई दिल्ली: राजनीतिक दल चुनावों में अपनी जीत को सुनिश्चित करने के लिए कर्जमाफी अजिसे बड़े बड़े वादे करके सत्ता में आ रहे हैं और कर्जमाफी भी कर रहे हैं. ऐसे इस कर्जमाफी का सबसे ज्यादा बोझ बैंकों पर पड़ रहा है. जिसको लेकर RBI ने चिंता जाहिर की है.

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बतादें कि देश में कर्जमाफी का दावा करना अब एक ट्रेंड सा बन गया है. कोई भी राजनीतिक दल चुनाव में जीतने के लिए ऐसे वादे कर दे रहा है और चुनाव जीतने कर्जमाफी भी कर रहा है. जिससे बैंकों को बड़ा घटा उठाना पड़ रहा है. कर्जमाफी से बैंकों को नुक्सान हो रहा है साथ ही देश की अर्थव्यवस्था का बिगड़ रही है. आने वाले समय में चुनावों में कर्जमाफी जैसी मुद्दे बड़े मुद्दे बन जायेंगे जोकि देश की अर्थव्यवस्था के लिए सच में बड़ा खतरा होंगे. जिसको भांपते हुए RBI ने कर्ज माफी के साइड इफेक्ट्स गिनाते हुए सरकार को इशारों ही इशारों में आगाह किया है.

रिजर्व बैंक के मुताबिक, किसानों की कर्ज माफी से बैंक भविष्य में किसानों को कर्ज देने में कंजूसी कर सकते हैं. RBI के आंकड़े बताते हैं कि वर्ष 2016-17 में कृषि कार्य के लिए आवंटित कर्ज की वृद्धि दर 12.4 फीसदी थी जो वर्ष 2017-18 में घट कर 3.8 फीसद रह गई थी. चालू वित्त वर्ष के पहले छह महीने में यह 5.8 फीसदी है, RBI ने इसके लिए कृषि कर्ज माफी को जिम्मेदार तो ठहराया है. RBI ने कहा कि देश में कर्जमाफी को लेकर राजनीतिक दलों में बहस के साथ ही किसान कर्ज चुकाने छोड़ देते हैं. जिससे बैंकों पर बोझ बढ़ता है, किसानों को लगता है कि उनका कर्ज कोई न कोई सरकार माफ़ ही कर देगी और अब ऐसा ही होता है.

जिससे बैंक पर बोझ बढ़ रहा है. इन हालातों में किसानों की तरफ से कर्ज नहीं मिलने की आशंका के बाद बैंक भी उन्हें कर्ज देने में हिचकने लगते हैं. और ऐसा भी हो सकता है कि बैंक किसानों को कर्ज देना ही बंद कर दें. हाल ही में RBI के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन ने भी किसानों की कर्ज माफी के साइड इफेक्ट गिनाए थे. उन्होंने कहा था कि ऐसे फैसलों से राज्य और केंद्र की अर्थव्यवस्था पर निगेटिव असर पड़ता है. रघुराम राजन ने कहा कि किसानों की कर्ज माफी का सबसे बड़ा फायदा साठगांठ वालों को मिलता है. इसका फायदा गरीबों की जगह अमीर किसानों को मिलता है. जबकि जिन कर्जमाफी की जरूरत होती है वह कर्ज तले दबे ही रहते हैं.

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