October 23, 2018
Kavita/kahaanee

हास्य: भारत को चमका देंगे हम, सिर्फ चुनावी नारों में…

हास्य: भारत  को  चमका  देंगे  हम, सिर्फ  चुनावी  नारों  में…

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भारत  को  चमका  देंगे  हम, सिर्फ  चुनावी  नारों  में

भूखे  किस्से  तुम  भी  पढ़ना, बंद  करो अखबारों  में

 

राशन ,कपड़े ,घर की  खातिर  आशाएं  गिरवी  होंगी

भाव  सुनो  तो  डर  लगता  है  आग लगी बाजारों में

 

खून- खराबा,  चीखें,  मातम  सहमा  सारा  मंजर  है

कैसे    सांसे   लेगा   इन्सां   इन   भुतही   दीवारों  में

 

दारू- मुर्गा , कत्ल  ,बकैती   ,परधानी   में  जायज है

मनरेगा   से   शान  बढ़ाएं  ,जो  थे  कल  बटमारों  में

 

मोबाइल  टीवी  के  जिम्मे ,बचपन  अब  संवाद  करे

रोज   सहेजें   दादी   किस्से, अपने   बंद  पिटारों  में

 

क्रांति बिगुल मत फूंक यहाँ पर,ये खच्चर का बाड़ा है

धार  लगाते  थक  जाओगो,  जंग  लगे  हथियारों  में

 

तुझको ‘नज्म’ समझ कब पाये बस चिल्लाते नाम तेरा

ईश्वर  थोड़ी   अक्ल   जरूरी, धर्म   के   ठेकेदारों  में

Subhash Ji

       Subhash Ji

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यह हास्य कविता हमें उत्तर प्रदेश के लखनऊ से सुभाष जी ने भेजी है.

(यह लेखक के निजी विचार हो सकते हैं)
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