April 27, 2018
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कफन भी न नसीब हुआ 39 भारतीयों को, अब हो रहा है कथित खुलासा

जेआईडेस्क: ईराक के मोसुल में साल 2014 में मारे गये 39 भारतीयों में से 38 भारतीयों के शवों  के अवशेष सोमवार को भारत आ चुके हैं. जिसके बाद उनके परिजनों को अवशेष सौंपने का कम शुरू हो गया है. लेकिन इसी बीच एक हैरान कर देने वाला बयान भी आया है. वह बयान देश के विदेश राज्य मंत्री ने दिया है.

सोमवार को 38 भारतीयों के शवों को भारत लाने के बाद विदेश राज्य मंत्री वीके सिंह ने जानकारी देते हए कहा है कि ईराक में मोसुल में मारे गये सभी 39 भारतीय अवैध तरीके से ईराक में दाखिल हुए थे. यह बात उन्होंने सोमवार को ही ईराक से लौटने के बाद मीडिया से कही. जिसके बाद इस महत्वपूर्ण जानकारी से देश अवगत हो सका. सोमवार को ही ईराक में मारे गये 38 लोगों के शवों के अवशेषों को सेना के विशेष विमान से भारत लाया गया था. यह सेना का विशेष विमान पंजाब के अमृतसर जाकर उतरा था.

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जहाँ से अब सभी परिजनों को अवशेषों को सौंपा जाएगा. लेकिन सवाल यह उठता है कि आखिरकार सरकार को अब यह जानकारी देने का क्या औचित्य था कि सभी 39 भारतीय अवैध तरीके से ईराक गये थे. क्या सरकार को यह बात पहले से पता नहीं थी. यह मामला तो साल 2014 का है, जब मोसुल से ISIS के आतंकियों ने 39 भारतीयों को अगवा कर हत्या कर दी थी. जिसके बाद से सरकार लगातार बातें बनाती आ रही है, पहले तो इस मामले में सरकार यही कहती रही कि सभी 39 भारतीयों को सकुशल वापस लाया लाया जायेगा. जबकि डीएनए और फोरेंसिक रिपोर्ट का हवाला देकर कहा जा रहा है कि उनकी हत्या चार साल पहले ही यानी कि 2014 में ही कर दी गयी थी. जिसकी जानकारी एक भारतीय ने सरकार को दी भी थी लेकिन सरकार ने उसकी बातों को सिरे से खारिज कर दिया.

लेकिन सत्य शायद वही था. वहीँ अब 39 में से 38 के शव के अवशेष भारत आ गये हैं. क्योंकि एक शव का अभी भी डीएनए सैम्पल मैच नहीं किया है. हालंकि अब कुछ भी कहा जाए कि जिन लाशों को कफन भी न नसीब हुआ हो उनके बारे में अब देश के विदेश राज्य मंत्री खुलासे कर रहे हैं. मंत्री जी को पता होना चाहिए कि अपना घर छोड़कर पैसा कमाने विदेश कौन और क्यों जाता है? लेकिन जिनकी संवेदनाएं मर जाती हैं उन्हें इससे क्या फर्क पड़ता है…

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