November 18, 2018
Shiksha

तो जिन्ना को पीएम बनाना चाहते थे गाँधी, पर नेहरु ने नहीं मानी बात…!

नई दिल्ली: आध्यात्मिक गुरू दलाई लामा ने भारतीय राजनीति को हिला देने वाला बयान दिया है. जिसका जिक्र पहलीबार हुआ है. बुधवार को एक कार्यक्रम में शामिल होने हुए आध्यात्मिक गुरू दलाई लामा ने कहा कि भारत और पाकिस्तान के बंटवारे को रोका जा सकता था, लेकिन नेहरु की पीएम बनने की लालसा ने ऐसा नहीं होने दिया.

बतादें कि तिब्बती आध्यात्मिक गुरू दलाई लामा बुधवार को गोवा की राजधानी पणजी से 40 किमी दूर गोवा प्रबंध संस्थान के एक कार्यक्रम में शामिल होने के लिए पहुंचे हुए थे. जहाँ 83 वर्षीय दलिया लामा ने अपने अनुभव को साझा करते हुए बड़ा खुलासा किया. उन्होंने कहा, अगर महात्मा गांधी की जिन्ना को पहला प्रधानमंत्री बनाने की इच्छा को अमल में लाया गया होता, तो भारत का बंटवारा नहीं होता.

दरअसल उन्होंने सही निर्णय लेने को लेकर एक छात्र द्वारा पूछे गये सवाल का जवाब देते हुए कहा कि, ‘मेरा मानना है कि सामंती व्यवस्था के बजाय प्रजातांत्रिक प्रणाली बहुत अच्छी होती है. सामंती व्यवस्था में कुछ लोगों के हाथों में निर्णय लेने की शक्ति होती है, जो बहुत खतरनाक होता है.’ आगे भारत को अंकित करते हुए कहा कि, ‘अब भारत की तरफ देखें. मुझे लगता है कि महात्मा गांधी जिन्ना को प्रधानमंत्री का पद देने के बेहद इच्छुक थे, लेकिन पंडित नेहरू ने इसे स्वीकार नहीं किया.’

जिसके कारण भारत का बंटवारा हुआ. आगे दलाई लामा आने कहा कि, ‘मुझे लगता है कि खुद को प्रधानमंत्री के रूप में देखना पंडित नेहरू का आत्म केंद्रित रवैया था. अगर महात्मा गांधी की सोच को स्वीकारा गया होता, तो भारत और पाकिस्तान एक होते.’ उन्होंने कहा, ‘मैं पंडित नेहरू को बहुत अच्छी तरह जानता हूं. वो बेहद अनुभवी और बुद्धिमान व्यक्ति थे, लेकिन कभी-कभी गलतियां हो जाती हैं.’ वहीँ उनके इस कथित बयान के बाद देश की राजनीति में भूचाल आना तय माना जा रहा है. जहाँ कांग्रेस पार्टी पर पहले से ही सत्ता का लालची और भारत के टुकड़े करवाने का कथित आरोप लगता रहा है. ऐसे में दलाईवाणी ने एकबार कांग्रेस को बड़ी मुश्किल में डाल दिया है.

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