October 21, 2018
Rajneeti Rajya

करुणानिधि: भगवान को काल्पनिक मानते थे तमिलनाडू के ‘भगवान’

चेन्नई: तमिलनाडु की राजनीति में सबसे बड़ा अनुभव रखने वाले द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (डीएमके) के सुप्रीमो करुणानिधि का मंगलवार शाम को निधन हो गया है. उनके निधन के बाद पूरे राज्य में शोक ली लहर बनी हुई है. उन्हें चाहने वाले यह स्वीकार नहीं कर पा रह हैं. उनके ‘भगवान्’ को उनसे छीन लिया गया है.

दक्षिण की राजनीति के पितामह कहे जाने वाले द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (डीएमके) के सुप्रीमो करुणानिधि के निधन के बाद राज्यभर में उनके समर्थक बिलख रहे हैं. दरअसल तमिलनाडु में एक नास्तिक विचारधारा वाले इंसान का ऐसा करिश्मा हुआ की वह खुद भगवान बन बैठा. आपको जानकार हैरानी होगी कि एम करुणानिधि खुद को नास्तिक मानते थे. वैसे वह ईसाई समुदाय से आते थे लेकिन उनके खुद नास्तिक होने के बाद भी उनके समर्थकों ने किसी भगवान से कम दर्जा नहीं दिया है. राज्य में कई जगह उनके नाम के मन्दिर तक बने हुए हैं. पांच बार सीएम बनकर राज्य का प्रतिनिधित्व करने वाले करुणानिधि को समाज सुधार के कार्यों के लिए जाना जाता था. वह दक्षिण के बड़े समाज सुधारक पेरियार से प्रेरित थे. जिन्होंने दबे कुचलों के खिलाफ लम्बी लड़ाई लड़ी थी.

भगवान् राम कर की थी विवादित टिप्पणी

तमिलनाडु में ‘भगवान’ का दर्जा प्राप्त एम करुणानिधि भगवान् राम के बड़े आलोचक थे. वह भगवान राम ने होने ओर न होने के अक्सर सबूत माँगा करते थे. उन्होंने कई बार भगवान राम को लेकर बयान दिया जोकि काफी विवादों से घिरा रहा. एम करुणानिधि ने 2007 में कहा था, कि कुछ लोग कहते हैं कि हजारों साल पहले एक व्यक्ति था, जिसका नाम राम था. उसके द्वारा बनाए गए पुल (राम सेतु) को मत छुओ. यह राम कौन है? वह कौन से इंजीनियरिंग कॉलेज से ग्रैजुएट थे, क्या इसका कोई सबूत है? राम काल्पनिक चरित्र है. इतना ही नहीं इसके आगे उन्होंने यह भी माना था अकी वह भगवान् राम के आलोचक हैं. वह भगवान् राम के होने न होने पर सवाल खड़े करते रहे हैं. खुद को नास्तिक ओर कर्म की राम पर चलने वाले एम करुणानिधि खुद ही तमिलनाडू के भगवान् बन गया थे.

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