November 18, 2018
Badi khabren Delhi

LGBT ने जीती जंग: जिसके आगे कोर्ट ने सुनाया समलैंगिकता पर यह फैसला  

नई दिल्ली: समलैंगिकता को लेकर देश की सबसे बड़ी अदालत सुप्रीम कोर्ट ने आज बड़ा ही एतिहासिक फैसला सुनाया है. वहीँ इस फैसले के पीछे और समलैंगिकों को लेकर कानूनी जंग लड़ने वाले संस्था LGBT ने कोर्ट के फैसले पर बड़ा बयान दिया है.

दरअसल लम्बे सम्स्य से कोर्ट में इस मामले पर सुनवाई चल रही थी. जिसके बाद गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट ने मामले पर फैसला सुनाने हुए साफ़ कर दिया है कि भारत में दो वयस्क समलैंगिकों के बीच सहमति से बनाए गए संबंध अब अपराध नहीं माने जायेंगे. गुरुवार को मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा की अगुवाई वाली संवैधानिक पीठ के पाँचों जजों ने इस मामले में बड़ा फैसला लेते हुए धारा 377 को मौलिक अधिकारों का हनन माना है.

कोर्ट की बेंच ने कहा कि, दो वयस्कों के बीच सहमति से बनाए गए समलैंगिक संबंधों को अपराध नहीं माना जा सकता है. साथ ही कोर्ट ने कहा कि यह एक व्यक्तिगत मामला है. कोर्ट ने कहा कि इस मामले को पहले ही संसंद से इजाजत मिल जानी चाहिए थी, मुख्य न्यायाधीश जस्टिस दीपक मिश्रा और जस्टिस खानविलकर ने समलैंगिकता पर फैसला लेते हुए कहा कि सबको समान अधिकार सुनिश्चित करने की जरूरत है. समाज को पूर्वाग्रहों से मुक्त होना चाहिए.

हर बादल में इंद्रधनुष खोजना चाहिए. संवैधानिक पीठ के जजों ने कहा कि संवैधानिक लोकतांत्रिक व्यवस्था में परिवर्तन जरूरी है. जीवन का अधिकार मानवीय अधिकार है. इस अधिकार के बिना बाकी अधिकार औचित्यहीन हैं. आगे कोर्ट ने कहा कि हमारी विविधता को स्वीकृति देनी होगी. व्यक्तिगत पसंद को सम्मान देना होगा. एलजीबीटी यानी की (लेस्बियन गे बाइसेक्सुअल ट्रांसजेंडर) को भी समान अधिकार है.

दरअसल इसी संस्था ने अपने अधिअकारों के लिए धारा 377 को कोर्ट में चुनौती दी थी. संस्था ने संविधान की के मौलिक अधिकारों का हवाला देते हुए इसे चुनौती दी थी. जिसपर कोर्ट ने भी अपनी मुहर लगा दी है.  कोर्ट ने कहा कि, ‘राइट टु लाइफ LGBT उनका अधिकार है और यह सुनिश्चित करना कोर्ट का काम है. आगे बड़ी अदालत ने कहा कि सहमति से बालिगों के समलैंगिक संबंध हानिकारक नहीं है. साथ ही आईपीसी की धारा 377 संविधान के अनुच्छेद 14 (जिसमें देश के नागरिकों के मूल अधिकारों को दिया गया है) के तहत मौजूदा रूप में सही नहीं है.

LGBT ने जताई ख़ुशी

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद इस धारा के खिलाफ कानूनी जंग लड़ रही LGBT फैसले पर खुशी जताई है.

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