October 23, 2018
Rajneeti

यह हैं कांग्रेस के चाणक्य, जिन्होंने हिला दी बीजेपी की जमीन

बेंगलुरु: राहुल गांधी ने कांग्रेस पार्टी का अध्यक्ष बनने के बाद यह पहले किसी राज्य में उनकी सरकार बनी है. यहाँ जीत नहीं कह सकते हैं लेकिन उनके पार्टी नेत्रत्व में किसी राज्य की सत्ता उनके हाथ लगी है. ऐसे में सवाल जरुर उठ रहा है कि लगातार हारने वाले और बीजेपी-अमित शाह की रणनीति के आगे पस्त होने वाली कांग्रेस ने ऐसा कर कैसे दिया है. तो आज कांग्रेस के उस चाणक्य से आपको मिलवाते हैं जिसने बीजेपी के मुंह से सत्ता छीन ली है….?

कर्नाटक में बीजेपी, नरेंद्र मोदी और अमित शाह के हाथ से सत्ता छीन कर कांग्रेस पार्टी की झोली में डालने के लिए सिर्फ एक सख्त को श्रेय दिया जा सकता है. जिसकी चाल के आगे केंद्र की सत्ताधारी बीजेपी भी पस्त हो गयी है. राहुल गाँधी दिसम्बर में कांग्रेस के प्रमुख बने थे, जिसके बाद गुजरात, हिमाचल प्रदेश, नागालैंड, त्रिपुरा मेघायल में चुनाव हुए, जहाँ कांग्रेस पार्टी को बुरी हार का सामना करना पड़ा.

यहाँ कई राज्यों से कांग्रेस की सरकार भी चली गयी. साल 2014 के बाद से काफी कम ही मौक़ा आया है जब कांग्रेस पार्टी के ख़ुशी भी खबर आई हो. पंजाब को छोड़कर किसी भी राज्य में कांग्रेस जीत नहीं हासिल कर सकी. कई राज्यों में अच्छी पोजीशन में आई भी लेकिन नरेंद्र मोदी और चाणक्य बुद्धि रखने वाले अमित शाह की फिरकी के आगे कांग्रेस को सत्ता नहीं ही नसीब हुई है. बीजेपी का आलम यह है कि जहाँ महज 2 सीट भी लाइ वहां भी उसने सरकार बनवा ली. ऐसे में कर्नाटक में बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी. 104 सीट होने के बाद भी बीजेपी की सरकार को बेईज्जत हो कर गिरना पड़ा.

यह इतना आसान नहीं था, कांग्रेस के कथित ऑडियो टेप को सुनकर अंदाजा लगाया जा सकता है कि बीजेपी ने राज्य की बीएस येदियुरप्पा सरकार को बचाने के लिए क्या क्या हाथ पैर नहीं मारे? प्रलोभन से लेकर धमकी तक, उसके बाद भी बीजेपी की रणनीति फेल हुई और कांग्रेस ने राज्य की बनी-बनाई बीजेपी की सरकार गिरवाकर सत्ता हासिल कर ली. ऐसे में कहा जाए कि यह सब कैसे हो गया तो इसके लिए अभी तक एक शख्स ही सामने आया है.

जिसकी रणनीति के आगे बीजेपी, अमित शाह, नरेंद्र मोदी और आरएसएस का जोर नहीं चला. अब नाम बता ही देते हैं. वह है कर्नाटक राज्य में कांग्रेस नेता डीके शिवकुमार, जिनकी फिरकी में बीएस येदियुरप्पा सरकार आ गयी और धडाम भी हो गयी. डीके शिवकुमार को कांग्रेस पार्टी का नया चाणक्य कहा जा सकता है, जिसने करिश्मा (कांग्रेस के लिए) कर दिखाया है. सबसे ज्यादा सीट वाली बीजेपी से सत्ता छीन ली वह भी महज ढाई दिन में ही. कांग्रेस नेता डीके शिवकुमार की चुनाव से पहले और परिणाम आने तक शायद ही यह मीडिया में इतना पापुलर हुए हों लेकिन परिणाम आने के बाद डीके शिवकुमार की राज्य में जो भूमिका रही है उसने बीजेपी की चूलें हिला दी हैं.

राज्य में कांग्रेस पार्टी की हर रणनीति चाल पर यह काम करते रहे और बीजेपी को छकाते रहे. राज्य में त्रिशंकु विधानसभा के नतीजे जैसे ही सामने आये तो कांग्रेस ने वही चाल सबसे पहले चल दी, जोकि अभी तक बीजेपी चलती आई थी. कांग्रेस ने जनता दल सेक्युलर के साथ गठबंधन का ऐलान कर उसके नेता को सीएम बनाने का रास्ता दे दिया. जोकि कुछ ही समय बाद बीजेपी कर सकती थी. राज्य में  खंडित जनादेश आने के बाद बीजेपी से अपने विधायकों को बचाने के लिए डीके शिवकुमार ने ही सारी रणनीति अपनाई, अपने और जेडीएस के विधायकों को बीजेपी की नजर से ओझल करते रहे. जिससे खरीद फरोख्त न की जा सके. क्योंकि राज्य में 100-100 करोड़ का ऑफ़र खुलें तौर पर दिए जा रहे थे. जिसका ऑडियो टेप भी जारी हो चुका है. पैसा, सीबीआई, ईडी और इनकम टैक्स सहित सभी सरकारी एजेंसियों को धमकी के बाद भी राज्य में कांग्रेस और जेडीएस का कोई भी नेता बीजेपी के सम्पर्क में नहीं आ सका.

बताया जा रहा है कि जेडीएस के साथ गठबंधन का प्लान डीके शिवकुमार ने ही तैयार किया था. जिसमें किसे भी हाल में बीजेपी को सत्ता में आने से रोका जा सके. राज्य में बीजेपी के बीएस येदियुरप्पा की सरकार को महज 7 सीटें चाहिए थी, जोकि हासिल करना मुश्किल नहीं था. और राज्य में बिना बहुमत के सरकार का गठन भी यही सोचकर हुआ था कि किसी तरह से ही सरकार को बहुमत मिल ही जाना है. लेकिन राज्य में डीके शिवकुमार के जो चाल चली उससे बीजेपी की सारी उम्मीदों पर पानी फिर गया. राज्य में बीएस येदियुरप्पा सरकार के शपथ ग्रहण के बाद से ही डीके शिवकुमार ने अपने और जेडीएस के MLAs को यहाँ से वहां भेजना शुरू कर दिया.

जिससे बीजेपी को अपने MLAs से संपर्क करने से रोका जा सके. डीके शिवकुमार के अनुसार ही हाईकमान भी दिल्ली में बैठकर सुप्रीम कोर्ट से लेकर पल पल में प्रेस से जुड़े रहे. जिससे बीजेपी की सारी रणनीति चौपट हो गयी. डीके शिवकुमार का यह कोई पहला मौक़ा नहीं हैं जब कांग्रेस को बचाया हो. डीके शिवकुमार इससे पहले गुजरात में राज्यसभा चुनाव के दौरान भी पार्टी की काफी मदद की थी. ठीक वहीँ रानीति इसबार भी अपनाई गयी है.

जिससे राज्य में सबसे बड़ी पार्टी और बिना बहुमत वाली सरकार को धरासाई कर दिया और सत्ता कांग्रेस जेडीएस गठबंधन दल को दिलवा दी. ऐसे में डीके शिवकुमार को कांग्रेस पार्टी का चाणक्य कहा जा सकता है? जिसकी चाल, राजनीति और रणनीति के आगे बीजेपी की सारी पलटन फुस्स हो गयी.

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