November 18, 2018
Rajneeti

राज्यपाल नहीं मोदी-शाह का मुखौटा हैं वाजुभाई वाला, संविधान की कर दी हत्या..  

बेंगलुरु: कर्नाटक के राज्यपाल वाजुभाई वाला ने बीजेपी को सरकार बनाने का न्यौता और उन्हें 15 दिन में बहुमत साबित करने का समय देने के बाद से ही उनकी कार्यप्रणाली को लेकर सवाल खड़ा हो गया है. कांग्रेस ने कहा कि राजपाल बीजेपी कार्यकर्ता के तौर पर काम कर रहे हैं.

बतादें कि कर्नाटक में संवैधानिक पद पर बैठे राज्यपाल वाजुभाई वाला को लेकर कांग्रेस ने भडकी हुई है. उनकी कार्यप्रणाली पर कांग्रेस नेता गुलाम नबी आजाद ने बुधवार को ही सवाल उठाया था. राज्यपाल राज्य में बीजेपी के कार्यकर्ता के तौर पर काम कर रहे हैं. राज्य में बहुमत वाले दल को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित न करना उनका बीजेपी मोह दिखाता है, कि वह संविधान की शपथ खाने के बाद भी उनका रवैया बीजेपी कार्यकर्ता जैसा ही है. वहीँ अब लगातार कई कांग्रेसी नेताओं के बड़े बयान आ रहे हैं. जिसमें कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने राज्यपाल पर तीखा हमला बोला है.

सुरजेवाला ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी और अमित शाह के हस्तक्षेप से राज्यपाल ने संविधान का एनकाउंटर किया है, कानून की धज्जियां उड़ा दी गई हैं. आगे सुरजेवाला ने कहा कि मोदी, अमित शाह और वजुभाई की तिकड़ी कितना भी षड़यंत्र कर लें लेकिन सफल नहीं हो सकते. राज्य सभी कुछ बीजेपी के इशारे पर हो रहा है. संविधान का एनकाउंटर कर दिया गया है. संवैधानिक पद पर बैठे राज्यपाल एक बीजेपी के कार्यकर्ता का बर्ताव कर रहे हैं. वहीँ इस पर कांग्रेस नेता कपिल सिब्बल ने कहा है कि, राज्य में राज्यपाल की ओछी हरकत से वह आहात हैं. कांग्रेस पार्टी इस मामले पर राष्ट्रपति के पास जायेगी. कांग्रेस ने कहा कि, राज्यपाल को कानूनसम्मत काम करना चाहिए. कांग्रेस नेता ने कहा कि राज्य में हमारे पास बहुमत से ज्यादा सीटें हैं. उसके बाद भी राज्यपाल ने हमे सरकार बनाने का मौका नहीं दिया. हमने राज्यपाल से मिलकर उन्हें विधायकों के समर्थन की चिट्ठी भी दी थी.

साथ ही गोवा के एक मामले में सुप्रीम कोर्ट के निर्देश की कॉपी भी दी थी, जो कि कानून भी है. उसके बाद भी सारे नियम कायदे और कानून को धता बता कर राज्यपाल ने बीजेपी को सरकार बनाने का न्यौता दे दिया. राज्य में राज्यपाल बीजेपी का मुखौटा बनकर रह गये हैं. ज्ञात हो कि कर्नाटक चुनाव में बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है, लेकिन उसके पास बहुमत नहीं है.ऐसे में राज्य में कांग्रेस और जनता दल सेक्युलर ने गठबंधन कर सरकार बनाने के लिए बहुमत से ज्यादा सीटें जुटाकर सरकार बनाने का दावा पेश किया था, लेकिन राज्यपाल ने संवैधानिक मर्यादाओं को लांघ कर बीजेपी को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित कर दिया. जबकि उनके पास बहुमत है ही नहीं. ऐसे में कांग्रेस पार्टी ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया लेकिन वहां से भी उसे निराशा ही हाथ लगी.

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