April 27, 2018
Videsh

भारत से ‘निपटने’ ने लिए मालदीव ने मिलाया चीन से हाथ, यह है पुरानी दुश्मनी!

माले: मालदीव, भारत से क्या बदला ले रहा है या फिर उसे चीन ने कोई दाना डाला हुआ है. इस बात का अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि जबसे मालदीव में आपातकाल लगा है तब से भारत और मालदीव के रिश्तों में उतनी ही कडवाहट आ गयी है जितनी की चीन और पाकिस्तान के साथ है. अब सवाल यह है क्या मालदीव का तानाशाह राष्ट्रपति भारत से पुरानी दुश्मनी का बदला ले रहा है?

भारत और मालदीव के रिश्ते अभी से नहीं है, रिश्तों को दशकों बीत गये हैं इस समय में भारत ने मालदीव को चीन किए विरुद्ध के ढाल के रूप में प्रयोग किया. वहीँ मालदीव ने भी भारत का बखूबी साथ दिया. क्यों की वह भी चीन की विस्तारवाद और दमन की नीतियों से बाखिव परिचित था लेकिन पिछले कुछ समय से चीन और मालदीव में दोस्ती का गठजोड़ मजबूत हुआ है तो भारत के प्रति संदेह से भरा नजरिया, जब से देश में आपातकाल लगा तब से हालत कुछ ज्यादा ही ख़राब हुए हैं, भारत की सभी बातों को नजरंदाज कर मालदीव के राष्ट्रपति यामीन अब्दुल्ला ने देश को आपातकाल में धकेल कर विपक्ष और लोकतंत्र का दमन कर दिया, इस दौरान मालदीव लगातार चीन के साथ लगातार रिश्ते बढ़कर भारत को टार्गेट कर रहा है.

ऐसा क्यों हो रहा है इसके लिए आपको 1988 में लिए चलते हैं. 1988-89 में श्रीलंकाई पीपुल्स लिबरेशन ऑर्गेनाइजेशन ऑफ तमिल ईलम (PLOTE) तमिल अलगाववादी संगठन के साथ मिलकर मालदीव के अब्दुल्ला लूथफी के नेतृत्व में मालदीव की तत्कालीन सरकार का तख्तापलट करने की कोशिश की गयी थी. इस दौरान अगर भारत अपनी सेना न उतारता को मालदीव का ताखातापल्ट तय था. इस तख्तापलट की साजिश में मालदीव के वर्तमान राष्ट्रपति अब्दुल्ला यामीन की भी शामिल थे, लेकिन भारतीय सशस्त्र बलों द्वारा ऑपरेशन कैक्टस के आगे सभी ने घुटने टेक दिए और देश को तख्तापलट से बचा लिया.

जैसे जैसे राजनीतिक हालत बदले और कभी तख्तापलट की साजिश में शामिल रहे अब्दुल्ला यामीन ने सत्ता हासिल कर ली. वहीँ यामीन आज चीन के साथ मिलकर भारत से बदला लेने की कोशिश में लगा है. मालदीव के आपातकाल पर जहाँ पूरी दुनिया निंदा कर रही है वहीँ चीन इसे मालदीव का आतंरिक मामला बताकर समर्थन कर रहा है, साथ ही भारत को चेतावनी जारी कर यह भी कह रहा है कि ‘अगर भारत की ओर से कोई भी दखल दिया जाता है तो क्षेत्र में स्थित विकराल हो जायेगी’ चीन मालदीव के आगे हथियार डाल चुका है.

कहे तो मालदीव में जारी आपातकाल ओर चीन के साथ बढ़ते रिश्ते सब एक ही सिक्के दो पहलू हैं. चीन लम्बे समय से मालदीव पर नजरे बनाए हुए है. वह वहां कथित विकास का हवाला देकर अन्पोआ सैन्य अड्डा बनाना छटा है जिससे हिंदमहासागर पर एकाधिकार जमा सके.

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