November 13, 2018
Videsh

तो क्या भारत के कहने पर राष्ट्रपति पुतिन ने रद्द किया था पाकिस्तान दौरा…

जेआईडेस्क: भारत और रूस के बीच दोस्ती आजादी से पहले ही शुरू हो गयी थी, दूसरे विश्व युद्ध के बाद जब दुनिया दो हिस्सों में बँटी तो भारत ने खुद को गुटनिरपेक्ष साबित किया, लेकिन भारत का झुकाव सोवियत संघ और समाजवाद के प्रति रहा है. ऐसे में एक वाक्या ऐसा हुआ कि रूस के राष्ट्रपति ने पाकिस्तान जाने का दौरा रद्द कर दिया. जिसके बाद कहा गया कि यह सब भारत के कहने पर हुआ.

दरअसल भारत और रूस की दोस्ती किसी से छिपी नहीं है. भारत और रूस को बचपन का साथी कह सकते हैं. क्योंकि भारत की आजादी से पहले ही रूस और भारत के विचारों में मेल खाने लगा था. पंडित नेहरु रुसी विचारधारा समाजवाद और सोवियत संघ के समर्थक रहे. ऐसे में भारत और रूस की दोस्ती के बीच में कर बार दरार भी डालने की कोशिश की गयी, लेकिन संभव नहीं हुआ.

भारत और रूस की दोस्ती किस प्रकार की है इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि, रुसी राष्ट्रपति आज तक पाकिस्तान नहीं गये. जिससे भारत नाराज न हो जाए. इसका बड़ा कारण यह भी है कि भारत, अपने ज्यादातर हथियारों की खरीद रूस से ही करता है, ऐसे में रूस भारत को नाराज नहीं करना चाहेगा. व्लादिमीर पुतिन खुद 18 सालों से रूस की सत्ता पर काबिज हैं, लेकिन वह आजतक पाकिस्तान नहीं गए. लेकिन वह भारत के दौरे पर कई मर्तबा आ चुके हैं. यहाँ तक कहा जाता है कि जब कोई अमरीकी राष्ट्रपति भारत आता है तो वह पाकिस्तान भी चला जाता है. लेकिन रूस के साथ ऐसा नहीं है.

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दक्षिण एशिया में भारत एकमात्र देश है जहां पुतिन आते हैं. भारत और रूस के ऐसे सम्बन्ध है कि बीच में पाकिस्तान कहीं भी दिखाई नहीं देता है. साल 2012, तीन अक्टूबर को इस्लामाबाद में चार देशों अफ़ग़ानिस्तान, पाकिस्तान, रूस और ताजिकिस्तान का सम्मेलन था. जिसमें रुसी प्रतिनिधित्वकर्ता को इस सम्मेलन में शामिल होने के लिए पाकिस्तान आना था. पाकिस्तान पूरी उम्मीद लगाये बैठा था कि इस सम्मेलन में शामिल होने के लिए पुतिन आएंगे और दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय वार्ता भी होगी. पुतिन की प्रस्तावित यात्रा को लेकर पाकिस्तानी मीडिया में काफ़ी शोर-मचा था. इसे ऐतिहासिक करार दिया गया था.

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साथ ही दक्षिण एशिया में बड़े उलटफेर वाला कहा गया था, क्योंकि अभी तक रूस, भारत तक की सीमित था. लेकिन अब वह पाकिस्तान भी आने वाले थे (ऐसा पाकिस्तानी मीडिया में बताया जा रहा था) लेकिन इस सम्मेलन के कुछ दिन पहले राष्ट्रपति पुतिन ने पाकिस्तान के तत्कालीन राष्ट्रपति आसिफ़ अली ज़रदारी को एक पत्र लिखकर सूचित किया कि वह इस सम्मेलन में नहीं आएंगे. जिससे पाकिस्तान की जमकर जग हंसाई हुई, आखिरकार इसका नतीजा यह रहा कि पाकिस्तान को सम्मेलन की टालना पड़ गया.

बाद में रूस ने बयान जारी कर भी कहा था कि सम्मेलन में रुसी राष्ट्रपति के जाने की बात ही नहीं हुई थी, फिर पाकिस्तान ने इस को इतना क्यों उछाला. रूसी विदेश मंत्रालय ने कहा था कि पुतिन के पाकिस्तान जाने की कोई ठोस वजह नहीं है. 2012 में पुतिन का यह दौरा रद्द हुआ तो पाकिस्तान ने इसका सीधा आरोप भारत पर लगा दिया.

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पाकिस्तानी मीडिया ने सवाल उधाते हुए कहा कि रूस और भारत के बीच अरबों डॉलर के सैन्य संबंध हैं, इसलिए भारत ने पुतिन पर पाकिस्तान नहीं जाने का दबाव डाला. जिसके कारण पुतिन ने पाकिस्तान का दौरा रद्द कर दिया. लेकिन हकीकत यह थी कि रूस ने पुतिन के दौरे की पुष्टि ही नहीं की थी, फिर भी पाकिस्तान ने रुसी राष्ट्रपति के आने का ढिंढोरा पीट दिया. हालाँकि अब दक्षिण एशिया की स्थितियां बदल रही हैं. क्योंकि पाकिस्तान और रूस के बीच रिश्ते बेहतर होने लगे हैं.

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