April 26, 2018
Delhi

‘हमारा बचपन ट्रस्ट’ की ओर से इंटरस्लम मीटिंग का किया गया आयोजन, आंगनवाड़ी के कार्यों को लेकर हुई चर्चा

‘हमारा बचपन ट्रस्ट’ की और से सोमवार (15 अप्रैल 2018) को द्वारा बी-4 हरि इन्क्लेव, सुल्तानपुरी, नार्थ दिल्ली- 110086, मे इंटरस्लम मीटिंग का आयोजन किया गया।

जिसमें हमारा बचपन के बाल लीडरो द्वारा बैठक की शुरुआत अपना परिचय और हमारा बचपन का परिचय देते हुये की गई, उसके बाद दो माह में हो रहे आंगनवाड़ी के कार्यो को लेकर चर्चा की गई और बाल लीडर *समीर अली* ने सबको बताया कि इस माह में हमने आंगनवाड़ी को लेकर अब तक कौन कौन से कार्य किये है जैसे कि सबसे पहले हमने आंगनवाड़ी फॉर्म के अनुसार दिए जाने वाले प्रशन के बारे मे आंगनवाड़ी मे जाकर ऑडिट किया और ऑडिट फोर्म को पूरा किया जिससे हमें पता चला वहाँ पर और क्या क्या सुधार होने की आवश्कता है।

जिसके बाद सभी बाल सदस्यों ने ग्रुप बनाकर अपने सपनों की आंगनवाड़ी का एक सुंदर चित्रकारी द्वारा दर्शया और उसके अंदर सभी उन चीज़ों का चित्र बनाया जैसा उनके अनुसार हो और फिर उस चित्र द्वारा बनाये गईं आंगनवाड़ी के बारे मे सबको बताया कि हमने बच्चों के अनुसार खिलौने बनाये हैं जिसमें गिनती और अ से अ: तक अक्षर लिखें हुये है ताकि खेल खेल मे बच्चों को अक्षरों का ज्ञान हो सके।

ग्रुप नम्बर दो मे हामिद ने बताया कि हमने इस चित्र द्वारा ये दिखया हैं कि आंगनवाड़ी मे बच्चों और गर्भवती महिलाओं के दवाई और चेकउप के लिए अलग कमरा होना चाहिए, पीने का पानी साफ फिल्टर वाला होना चाहिए, फिर *ग्रुप नम्बर तीन मे वारिश अली* ने बताया कि हमने अपने सपनो की आंगनवाड़ी में बच्चों के अनुसार टॉयलेट बनाया है जिस मे छोटे बच्चों को कोई परेशानी न हो और आंगनवाड़ी के बाहर थोड़ा सा हिस्सा खेल कूद के लिए होना चाहिए ताकि बच्चे आराम से खेल सके।

इसी प्रकार ग्रुप नंबर चार मे मुस्कान ने बताया कि हमने अपने चित्र में बच्चों के लिये खराब चीज़ो के से बने खिलौने झूले बनकर दर्शया है ताकि बच्चे झूल सके और खेल सके, और फिर आगे आने वाले दिनों मे हम आंगनवाड़ी को और अधिक कैसे आकर्षित बनाये ताकि आंगनवाड़ी मे अधिक से अधिक बच्चे आ सकें इस पर चर्चा की गई फिर बच्चों को एक मिनी फिल्म दिखाई गई और फिर फिल्म देखकर बाल सदस्यों से पूछा गया कि इस फ़िल्म को देखकर अपने क्या सीखा और क्या शिक्षा मिलती है फिर बाल लीडर प्रिंस ने बताया कि इस फ़िल्म से हमने ये शिक्षा मिली कि अगर हम किसी भी मुश्किल से मुश्किल काम करने का निश्चय कर ले तो कोई भी काम कर सकते है और हमें अपने अंदर कोई भी गलत विकार नहीं आने देना चाहिए जो हमे हरा सके।

Report: Suresh Kumar

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