October 22, 2018
Shiksha

#Friendship Day:  दोस्ती में नो सॉरी और नो थैंक्यू 

जेआईडेस्क: आज दोस्ती दिवस है मतलब फ्रेन्डशिप डे. दोस्ती एक ऐसा रिश्ता है जिसे खून के रिश्ते का नाम देने की जरूरत नहीं होती है. हम सभी की जिंदगी में दोस्त की बेहद खास जगह होती है और उसे हम अपनी जिन्दगी का अहम हिस्सा बना लेते है. वैसे तो दोस्ती निभाने के लिए किसी खास दिन की जरूरत नहीं होती है. किसी ने ठीक ही कहा है:

दोस्ती चेहरे की मुसकान होती है

दोस्ती सुख दुख की पहचान होती है

रूठ भी जाए हम तो दिल से मत लगाना

क्योंकि दोस्ती थोड़ी सी नादान होती है

कुछ दोस्त तो इतने खास होते हैं कि वह हमारे बाकी सब रिश्तों से ऊपर लगने लगते हैं. यू तो दोस्ती का फितूर सबके सिर चढ़ कर बोलता है मगर कभी- कभी उसका अहसास कराना जरूरी हो जाता है इसलिए अगस्त माह में हम फ्रेंडशिप डे के जरिए दोस्ती का अहसास करा सकते हैं. दोस्ती के सफर में कुछ मुश्किलें भी आती हैं, लेकिन दोस्ती उन तमाम मुश्किलों को मात देकर एक मिसाल कायम करती है. दोस्ती की असल मिलास तो कृष्ण और सुदामा है. दोस्ती की अनेक परिभाषाएं है. न जाने कितने ही लेखकों ने अपनी कलम से दोस्ती पर कहानियां लिखी है और शायरों ने दोस्ती पर शायरियां लिखी हैं. जरा सोच कर देखिए बिना दोस्तों के जिंदगी कितनी बोरिंग हो जाती.

हम किसके साथ अपने दिल की बात शेयर करते साथ ही बातों-बातों में किसकी टांग खिंचते ये सब दोस्तों के बिना मुमकिन नहीं. हंसी-मजाक, रूठना- मनाना बस यही है दोस्ती. पहले के लोग दोस्ती निभाने में विश्वास रखते थे मगर आज दोस्ती एक दिखावे की निशानी बन कर रह गई है. दिल की दोस्ती अब कलाई में बंधे धागे की तरह सिमट कर रह गई है. अब जेब के रूपए ही दोस्तों की संख्या तय करते है. कहीं न कहीं हमारे हिन्दी सिनेमा ने दोस्ती जैसे पाक रिश्ते को  फिल्मों में सहज कर रखा है. अनगिनत फिल्मों हैं जिसमें दोस्ती को बखूबी दिखाया और निभाया गया है .

निदा फाजली की पंक्ति:

बात कम कीजिए जहानत तो छुपाते रहिए

अजनबी शहर है यहां दोस्त बनाते रहिए

जानिये ‘दोस्ती’ का इतिहास

जानते हैं क्या है फ्रेंडशिप डे का इतिहास

-फ्रेंडशिप डे के रूप में मनाये जाने वाले इस दिन की शुरुआत साल 1919 में हॉलमार्क कार्ड के संस्थापक जोस हॉल के सुझाव पर हुई थी. वहीँ इसके बाद 1935 में पहली बार यूनाइटेड स्टेट्स कांग्रेस ने अगस्त के पहले रविवार को फ्रेंडशिप डे मनाना शुरू किया.

भारत में अगस्त के पहले रविवार को फ्रेंडशिप डे मनाया जाता है, लेकिन दक्षिण अमेरिकी देशों में जुलाई महीने को काफ़ी पावन माना जाता है, इसलिए जुलाई के अंत में ही इस दिन को मनाया जाता है.

-करीब 60 साल पहले 1958 में पहली बार फ्रेंडशिप डे को अंतरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त हुई. यूनाइटेड नेशंस ने भी इस दिन पर अपनी मुहर लगा दी थी.

दोस्ती में कमाल की बात ये है कि इसका कोई मजहब नहीं होता. हम किसी को भी दोस्त बना सकते हैं. फिर चाहे वह किसी धर्म, जाति का क्यों न हो. वहीँ इस अवसर पर दोस्तों को फ्रेंडशिप बैंड, कार्ड, गिफ्ट्स दिए जाते हैं.

रिपोर्ट: सिमरन शर्मा

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