April 26, 2018
karobar

बजट सत्र: जमीनी स्तर पर कितना फिट बैठता है आर्थिक सर्वेक्षण…

जेआई डेस्क: सोमवार को देश के वित्तमंत्री अरुण जेटली ने आर्थिक सर्वेक्षण पेश किया है. संसद भवन में साल 2017-18 के आर्थिक सर्वेक्षण में बताया गया है कि आगामी साल 2018-19 में देश का जीडीपी ग्रोथ रेट करीब 7.5 रह सकता है. वहीँ आर्थिक सर्वेक्षण में दिखाया गया आकडा जमीने स्तर पर कहाँ टिकता है? यह समझने वाली बात है.

देश का बजट सत्र शुरू हो चुका है. सोमवार को राष्ट्रपति ने बजट सत्र से पूर्व संसद के दोनों सदनों के सदस्यों को संबोधित किया. वहीँ रह्स्त्रपति के संबोधन के साथ ही देश के केन्द्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने साल 2017-18 का आर्थिक सर्वेक्षण भी पेश किया. इस में बताया गया है कि आर्थिक सर्वेक्षण को देखते हुए वित्त वर्ष 2018-19 में देश की जीडीपी ग्रोथ रेट 7.5 फीसदी के करीब रह सकती है. वहीँ अभी देश की स्थित में बड़ा परिवर्तन देखने को मिल रहा है. अर्थव्यवस्था में भागदौड की स्थित बनी हुई है. विकासदर भले ही गिर रही हो लेकिन डायरेक्ट और इनडायरेक्ट टैक्स पेयर की संख्या में इजाफा हो रहा है. वहीँ पेश किये गये सर्वेक्षण के अनुसार जीएसटी के तहत इनडायरेक्ट टैक्स पेयर की संख्या पूर्व जीएसटी व्यवस्था से 50 फीसदी अधिक है. जीएसटी आने के बाद नवंबर 2016 के बाद 1.8 मिलियन लोगों ने इनकम टैक्स रिटर्न दाखिल किया है. यह बड़ा आकडा है. वहीँ आर्थिक सर्वेक्षण में सोशल सिक्योरिटी आंकड़ों (ईपीएफओ, ईएसआईसी) गैर-कृषि क्षेत्र (फॉर्मल सेक्टर) में रोजगार में 30 फीसदी की बढ़त दर्ज की गयी है. आर्थिक सर्वेक्षण में बताया जा रहा है कि देश की टॉप 1 फीसदी कंपनियां देश का कुल 38 फीसदी एक्सपोर्ट करती है. ब्राजील में टॉप एक फीसदी कंपनियां 72 फीसदी एक्सपोर्ट, जर्मनी में 68 फीसदी और अमेरिका जैसे देश में 55 फीसदी एक्सपोर्ट करती हैं. डीजल पेट्रोल की बढती कीमतों से जहा सरकार की भी चिंता बढ़ी हुई है. आगामी वित्त वर्ष में क्रूड आयल (कच्चा तेल) की कीमतों में इजाफा हो सकता है, जिससे डीजल पेट्रोल की कीमतें बढ़ सकती हैं. सर्वेक्षण के अनुसार आगामी वर्ष में यही बड़ी चुनौती साबित हो सकती है. हालाँकि सरकार डीजल-पेट्रोल को भी जीएसटी के दायरे में लाने पर विचार कर रही है.

बजट सत्र से पूर्व जारी आर्थिक सर्वेक्षण में सरकार ने वाहवाही लूटने की कोशिश की है. हालाँकि आर्थिक सर्वेक्षण के बाद भी सरकार के सामने कई बड़ी चुनौतियां है. इन सब से पार पाने के लिए सरकार के पास कम ही समय बचा है. क्योंकि साल 2019 में आम चुनाव होने है. विगत सालों में मंहगाई-रोजगार सहित कई मुद्दे सरकार के लिए खटकते रहे हैं. ऐसे में मोदी सरकार का यह बजट सत्र आमजनता के लिए क्या लेकर आती है यह आगे देखना होगा.

Related Posts

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Journalist India