November 13, 2018
Delhi Uttar Pradesh

31 साल बाद मिला हाशिमपुरा पीड़ितों को मिला न्याय, HC ने सुनाई उम्रकैद की सजा  

नई दिल्ली: भारतीय इतिहास की शर्मनाक घटना और आम जनता के भरोसे को तोड़ने वाले उस जघन्य अपराध पर दिल्ली हाईकोर्ट ने अज फैसला सुना दिया है. मेरठ के हाशिमपुरा पीड़ितों को 31 साल बाद न्याय मिला है.

बतादें कि साल 1987 के मेरठ में हुए चर्चित हाशिमपुरा कांड में बुधवार को दिल्ली हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाते हुए 16 पूर्व जवानों को दोषी करार दिया है. साथ ही उन्हें उम्रकैद की सजा सुनाते हुए उनकी जमानत याचिका भी खारिज कर दी है. इसके साथ ही अदालत ने सभी पर 10 हज़ार का जुर्माना भी लगाया गया है.

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जानकारी के लिए बतादें कि पूरा मामला 22 मई 1987 का है जब पीएसी की 41वीं वाहिनी के जवानों ने मेरठ के हाशिमपुरा से एक तलाशी अभियान के दौरान कई लोगों को उठा लिया था बाद में उसी दिन मुरादनगर में नहर के पास उनकी सामूहिक रूप से गोलीमार कर हत्या कर दी थी. यह भारतीय इतिहास की सबसे खौफनाक वारदात मानी जाती थी, जिसने आम जनता और जवानों के बीच बड़ी खाई बना दी थी.

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वहीँ इस मामले में साल 2015 में दिल्ली की तीस हज़ारी कोर्ट ने पीएसी के 19 आरोपी जवानों को बरी कर दिया था. उस वक्त कोर्ट ने माना था कि हत्या तो हुई है, लेकिन कोर्ट में यह साबित नहीं हुआ था कि हत्या में जवानों ने ही की है. वहीँ बुधवार को दिल्ली हाईकोर्ट ने तीस हजारी कोर्ट के फैसले को पलट दिया. एक याचिका में कहा गया था निचली अदालत के फैसले में कई खामियां हैं.

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निचली अदालत ने अपने फैसले में सभी आरोपी जवानों को हत्या, हत्या का प्रयास, सबूत के साथ छेड़छाड़ और षड्यंत्र के आरोपों से बरी कर दिया था. इस केस के 19 आरोपी थे, जिनमें से तीन आरोपियों की सुनवाई के दौरान मौत हो गई थी. निचली अदालत ने जिन लोगों को बरी किया था, उनमें सुरेश चंद्र शर्मा, निरंजन लाल, कमल सिंह, रामबीर सिंह, समीउल्लाह, महेश प्रसाद, जयपाल सिंह, राम ध्याम, सरवन कुमार, लीलाधर, हमवीर सिंह, कुंवर पजल सिंह, बुद्ध सिंह, बुधी सिंह, मोखम सिंह और बसंत वल्लभ का नाम शामिल थे.

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वहीँ हाईकोर्ट ने इस मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए सभी 16 पूर्व जवानों (19 जवान आरोपी थे जिसमें तीन की मौत हो गये है) को दोषी करार देते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई है.

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